Aravalli Hills: ‘100 मीटर ऊंचाई’अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश.में अरावली पहाड़ियों को लेकर पर्यावरण विदों और आम जनता के बीच में बहस छेड़ दी है। इस फैसले को 100 मीटर का फैसला कहा जा रहा है और इसमें यह साफ हो गया है कि अरावली इलाके में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अपने आप में जंगल के तौर पर क्लासिफाई नहीं किया जा सकता।
अरावली ट्रस्ट इस तरह के नारे लग रहे हैं और विशेषज्ञों की मानें तो इस फैसले पर उन्होंने भी गंभीर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि हरियाणा में सिर्फ दो चोटियां ही 100 मीटर से ऊपर है और इसको लेकर लगातार चिंता भी जाहिर की जा रही है और इसमें पहला तो है भवानी जिला और दूसरा है महेंद्रगढ़ जिला। बाकी क्षेत्र अब संरक्षण से बाहर हो सकता है।
अरावली थार मरुस्थल की धूल को रोकता है और भूजाल रिचार्ज करती है और जैव विविधता बनाए रखती है।

अगर संरक्षण कमजोर हुआ तो धूल और प्रदूषण बढ़ेगा। दिल्ली में पहले से ही समस्या काफी ज्यादा है और गर्मी भी काफी ज्यादा तीव्र गति होगी हैं।
Aravalli Hills: ‘100 मीटर ऊंचाई’यह बात भी सामने आ रही है।
स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं भी और ज्यादा बढ़ेंगी। जैसे कि सांस लेने में बीमारियां और भी कई दिक्कतें हो सकती हैं। लोगों का पलायन का खतरा भी हो सकता है क्योंकि रहने लायक जगह कम हो जाएगी।
अगर यह कमजोर हुई मरुस्थल तो थार का रेगिस्तान आगे बढ़ेगा और दुबई में धूल नहीं उड़ती क्योंकि वहां पर प्राकृतिक बैरियर मजबूत है। लेकिन दिल्ली में समस्या इसलिए है क्योंकि अरावली पर दबाव पड़ रहा है।
दिल्ली का पर्यावरण संतुलन क्यों महत्वपूर्ण है?

ब्रिटिश काल में दिल्ली को राजधानी इसलिए बनाया गया था क्योंकि एक तरफ अरावली और दूसरी तरफ यमुना नदी थी जो कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती थी। कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट करने का मुख्य कारण यही बताया जा रहा है
अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश.कोर्ट को केंद्र सरकार के प्रस्ताव को पूरी तरह से स्वीकार नहीं करना चाहिए था।
कोर्ट की अपनी सीमाएं हैं और इस मुद्दे पर गहन अध्ययन की जरूरत है और सेव अरावली अभियान की अपील ट्रस्ट ने ऐलान किया है कि वह 150 जिलों के जिला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। तथा साथ ही ऑनलाइन पिटीशन पर अब तक 42,000 लोग साइन कर चुके हैं। अभियान का लक्ष्य है फैसले के संभावित दुरुपयोग को रोकना और अरावली को पूर्ण संरक्षण दिलाना।
Aravalli Hills: ‘100 मीटर ऊंचाई अरावली उत्तर भारत की लाइफलाइन है ।

दिल्ली एनसीआर समेत पूरे क्षेत्र पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। अब सरकारों और समाज की जिम्मेदारी है कि संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए और फैसले के बाद उठे विवाद का मुख्य कारण यह है कि इससे अरावली को धीरे-धीरे कमजोर करने का रास्ता खुल सकता है। खतरा फैसले में नहीं है बल्कि उसके दुरुपयोग में है।
विकास के नाम पर ढील दी गई तो दिल्ली एनसीआर की हवा और भी ज्यादा जहरीली हो सकती है। भूजल जलस्तर और नीचे जा सकता है और साथ ही गर्मी अधिक बेरहम हो सकती है।
Aravalli Hills: ‘100 मीटर ऊंचाई’अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का आपको बता दें

अरावली का फैसला गुजरात से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक लगभग 800 कि.मी. का है और हरियाणा और राजस्थान में इसका बड़ा हिस्सा राजस्वय भूमि के रूप में दर्ज है और अब तक संरक्षण प्राप्त कर रहा है।
लेकिन दिल्ली को लेकर खासतौर पर जो चिंता जाहिर की गई है वो यह है कि अगर आप दिल्ली पोल्यूशन की बात करें तो पोल्यूशन बहुत ज्यादा रहता है। यहां पर एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है। धन्यवाद