भारत में महंगाई दर,एफएमसीजी उत्पादों में मूल्य वृद्धि,तेल से लेकर साबुन तक सब हुए महंगे?

भारत में महंगाई दर,एफएमसीजी उत्पादों में मूल्य वृद्धि,तेल से लेकर साबुन तक सब हुए महंगे

एक बार फिर से मानो भारत में महंगाई दर,लौट आई है। एफएमसीजी यानी कि रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियां अब अपनी चीजों के दाम बढ़ाने में लगी हैं। जिसमें तेल से लेकर साबुन और खाने-पीने की चीजें भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक कंपनियों ने सितंबर 2025 में जीएसटी में कटौती के बाद इन चीजों पर कीमत नहीं बढ़ाई थी।

भारत में महंगाई दर,के बीच इन कंपनियों ने अपने सामान को महंगा कर दिया है। इसकी एक बहुत बड़ी वजह कमजोर होता रुपया भी माना जा रहा है। और बता दें कि जीएसटी दरों में कटौती पिछले साल सितंबर में लागू होने के बाद आम लोगों को बड़ी राहत मिली थी जैसे साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट ,और तेल, जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती हो गई थी। हालांकि अब वह राहत खत्म हो रही है

एफएमसीजी उत्पादों में मूल्य वृद्धि,तेल से लेकर साबुन तक सब हुए महंगे

एफएमसीजी कंपनियां इनपुट लागत में बढ़ोतरी के चलते अब उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में 5% तक बढ़ोतरी कर रही है।

एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद कुछ महीनों तक रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखी गई या घटाई गई। उसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार गिरावट और वैश्विक बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते इनपुट लागत के मोर्चे पर दबाव बढ़ रहा है। जिसका कुछ भार अब ग्राहकों पर डालना पड़ रहा है।

डिटर्जेंट एवं हेयर ऑयल से लेकर चॉकलेट नूडल्स और अनाज समेत रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं के चुनिंदा पैकेट इस तिमाही में बढ़ी हुई कीमतों के साथ दुकानों पर पहुंचने लगा हैं। जैसे बिस्किट, नूडल्स और स्नैक्स, फूड पर जीएसटी दरों में कटौती से संबंधित छूट के कारण बिक्री मात्रा में औसतन 6% की सालाना वृद्धि हुई है।

DAB भारत में महंगाई दर,के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने बताया ।

भारत में महंगाई दर,कंपनी चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कीमतों में 2% वृद्धि कर रही है। बढ़ी हुई कीमतें अगले साल भी लागू रहेंगी। हमें मुनाफाखोरी रोधी उपायों के कारण मूल्य वृद्धि को स्थगित करना पड़ेगा।कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के प्रबंध निदेशक सुनील डिसूजा ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के कंपनी के नतीजों की घोषणा के दौरान कहा था दिसंबर तिमाही के अंत में चाय की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई थी लेकिन जनवरी से अप्रैल तक के आंकड़े शुरुआती कीमतों को निर्धारित करेंगे।

भारत में महंगाई दर,विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर

रुपया कई महीनों से लगातार नीचे गिर रहा है। व्यापार घाटे और वैश्विक असंतुलन के प्रभाव से 30 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 92.02 के सार्वकालिक निचले स्तर तक पहुंच गया है।

ऐसा इसीलिए हो रहा है क्योंकि वस्तुओं की लागत बढ़ रही है और रुपए पर दबाव बढ़ रहा है। एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें हाल के सप्ताह में बढ़ी है जिससे सल्फर और एन पैराफेन जैसी संबंधित वस्तुओं की लागत बढ़ गई है। वहीं नारियल तेल की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी हो गई है। रुपए के अवमूल्यन ने इनपुट लागतों को और बढ़ा दिया है।

भारत में महंगाई दर,वित्त साल राजस्ववर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 9% की साल दर साल राजस्व वृद्धि के बावजूद एफएमसीजी कंपनियां अपने मुनाफे को बढ़ाने में मुश्किलों का सामना कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार बिस्किट नूडल्स और स्नैक फूड्स पर जीएसटी कटौती के कारण बिक्री की मात्रा में औसतन 6% की साल दर साल वृद्धि हुई है।  धन्यवाद

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मोनू प्रजापति mkhindustannews.com इस वेबसाइट के मुख्य संपादक और न्यूज़ राइटर हैं। ये मुख्य रूप से क्रिकेट, आईपीएल और टीम इंडिया से जुड़ी ताज़ा खबरें कवर करते हैं। खेल जगत की हर बड़ी अपडेट को सबसे पहले पाठकों तक पहुँचाना इनका लक्ष्य है।"