भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने ब्लू बर्ड ब्लॉक-2, एक और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिशन कीऔर कदम बढ़ाया है।और इसरो ने 6100kg का अमेरिकी सैटेलाइट लॉन्च किया:बदल जाएगा मोबाइल नेटवर्क का अंदाज, जिसके बाद आज बुधवार सुबह ठीक 8:54 पर अपना हैवी लिफ्ट रॉकेट एलएमएम36 ल्च किया गया।
इस विशाल संचार उपग्रह को पृथ्वी के निचली कक्षा यानी कि लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया गया। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का एक बड़ा उदाहरण भी है।
इस प्रक्षेपण को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड यानी कि एनएसआईएल और अमेरिका की निजी अंतरिक्ष कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के बीच हुए वाणिज्यिक समझौते के तहत अंजाम दिया गया है।
इस मिशन के जरिए एक बार फिर भारत ने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इसरो के अनुसार ब्लू बर्ड 2 उपग्रह का वजन लगभग 6100 कि.ग्र. है जो अब तक एलवीएम3 रॉकेट के जरिए पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा।
इतना भारी पोलेट क्षमता के साथ यह मिशन एलवीएम3 की तकनीकी विश्वसनीयता और इसरो की उन्नत प्रक्षेपण क्षमताओं को भी दर्शाता है।
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2,अंतरराष्ट्रीय मिशनों के लिए भारत के रास्ते अब खोल देगी।

दुनिया भर के स्मार्टफोनों को सीधे 24 घंटे हाई स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान कर सके।
इस तकनीक के जरिए दूरदराज के इलाके, समुद्र और दुर्गम क्षेत्रों में भी बिना किसी पारंपरिक मोबाइल टावर के सीधे सेटेलाइट से मोबाइल कनेक्टिविटी संभव हो जाएगी।
इस उपग्रह की सबसे खास विशेषता है कि 223 वर्ग मीटर का यह फेस जैरी है। यही वजह है कि ब्लू बर्ड ब्लॉक टू को लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात किया गया है। यह अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन सेटेलाइट भी माना जा रहा है।
इतना विशाल एंटीना सिस्टम इसे एक साथ लाखों यूज़र्स को कवर करने और तेज और स्थिर नेटवर्क देने में सक्षम बनाता है। कंपनी का दावा है ये सेटेलाइट नेटवर्क 4G और 5G दोनों तकनीकों को सपोर्ट करने वाला है।
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2,मिशन का मुख्य उद्देश्य

इसरो ने 6100kg का अमेरिकी सैटेलाइट लॉन्च किया:बदल जाएगा मोबाइल नेटवर्क का अंदाज,
उपग्रह के जरिए सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इसके सफल होने से यह नेटवर्क दुनिया में कहीं भी कभी भी सभी के लिए 4G और 5G वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और हाई स्पीड डाटा सेवाएं प्रदान करेगा।
जहां अभी तक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच बहुत सीमित थी या ना के बराबर थी। इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्कूल के छात्र भी सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे हैं।
बच्चों में इसरो के एलवीएम 3M6 मिशन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

छात्रों ने यह भी बताया कि इतने बड़े और आधुनिक उपग्रह के प्रक्षेपण को अपनी आंखों से देखना उनके लिए एक प्रेरणादायक अनुभव रहा। इसरो का अगला टारगेट क्या है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं धन्यवाद














