Kaveri Engine:भारत में बने कावेरी इंजन की रूस में फ्लाइंग टेस्टिंग:कावेरी का इंजन क्यों फेल हुआ,

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सोशल मीडिया पर एक हैशटैग ट्रेंड करने लगा हैशटग फंड कावेरी इंजन तो इस हैशटैग के साथ एक तस्वीर भी वायरल हुई जिसमें ट्रंप पुतिन मैक्रो जिनपिंग और पीएम मोदी नजर आ रहे हैं

Kaveri Engine:रूस में क्‍यों हो रहा भारत के ‘पांचवी पीढ़ी’ के देशी कावेरी जेट इंजन का टेस्‍ट? पाकिस्‍तान के तुर्की ड्रोन को मिलेगी कड़ी टक्‍कर

यानी कावेरी इंजन के लिए फंड जुटाने की मुहिम सोशल मीडिया पर चल पड़ी थी लेकिन खुशी की बात यह है कि भारत सरकार ने अब एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है जिसके तहत कावेरी इंजन को अंतिम रूप दिया जाएगा

भारत भी जल्द जेट इंजन क्लब में शामिल होगा तो इस आर्टिकल में आगे हम जानेंगे कावेरी इंजन क्या है कावेरी इंजन को किसने बनाया है कावेरी इंजन से डिफेंस टेक्नोलॉजी में क्या बदलेगा यानी कावेरी इंजन से जुड़ी ए टू जेड जानकारी सबसे पहले जानेंगे

कावेरी इंजन है क्या भारत का एक स्वदेशी टर्बोफेन जेट इंजन है जिसका नाम दक्षिण भारत की कावेरी नदी पर कौन सी परियोजना है?शिवसमुद्र परियोजना कावेरी नदी पर स्थित है। कावेरी नदी के नाम पर रखा गया है कावेरी इंजन को गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट जीटीआरई द्वारा डीआरडीओ के तहत विकसित किया जा रहा है यह इंजन लगभग 80 किलटन थ्रस्ट जनरेट कर सकेगा यह इंजन हाई टेंपरेचर और हाई स्पीड कंडीशंस में भी थ्रस्ट लॉस को कम करने के लिए फ्लैट रेटेड डिज़ का उपयोग करता है स्वदेशी लड़ाकू विमानों और ड्रोनों में इस स्वदेशी इंजन का इस्तेमाल होगा यही वजह है कि हैशटग फंड कावेरी इंजन सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्सप बीते दो दिन से ट्रेंड कर रहा है

यूज़र्स कावेरी प्रोजेक्ट को तेजी करने और इसके लिए= आधुनिक फंडिंग की मांग कर रहे है ताकि भारत एक स्वदेशी जेट इंजन बना सके भारत डिफेंस सेक्टर में वैसे तो लगातार तरक्की कर रहा है लेकिन जेट इंजन बनाने को लेकर हम अब भी दूसरे देशों
पर निर्भर है

दुनिया के सिर्फ चार देश अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस और रूस ही फाइटर जेट्स के इंजन बना पाते हैं अब जो देश जेट इंजन नहीं बना पाते उन्हें इन देशों पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता है

दुनिया के ऐसे सिर्फ चार देश है अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस और रूसी फाइटर जेट्स के इंजन बना पाते हैं अब इसका नुकसान क्या है जो देश जेट इंजन नहीं बना पाते उन्हें इन देशों पर पूरी तरह से निर्भर रहना पड़ता है जिसका सीधा असर इसकी सप्लाई पर पड़ता है यानी जो देश जेट इंजंस बनाते हैं वह अपने मनमाने तरीके से जब सप्लाई करना चाहें तब सप्लाई कर सकते हैं जो युद्ध के समय नुकसानदायक साबित हो सकता है

सप्लाई के अलावा स्वदेशी जेट इंजन का विकास ना सिर्फ हमारी वायु सेना को मजबूती देता है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जरूरी होता है इसलिए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम को भारत की डिफेंस सेक्टर की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट कहा जा रहा है जिसकी शुरुआत तो 1980 के दशक में हुई थी

भारत सरकार ने इसके लिए करीब 380 करोड़ के बजट की मंजूरी भी दी लेकिन कुछ समय बाद ही यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया इस परियोजना को विभिन्न चुनौतियों के कारण तमाम बाधाओं और देरी का सामना करना पड़ा कॉम्प्लेक्स एडवांस टेक्नोलॉजी की जरूरत पश्चिम का बैन ट्रेंड वर्कफोर्स की कमी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता इसकी देरी के प्रमुख कारण थे

कावेरी इंजन प्रोजेक्ट क्या है? इस इंजन को 2008 में तकनीकी चुनौतियों के कारण तेजस से अलग कर दिया गया था और तेजस में अमेरिकी जेई F404 इंजन का उपयोग किया गया था और बात अगर वर्तमान स्थिति की करें तो कावेरी इंजन रूस में उड़ान परीक्षण से गुजर रहा है जिसमें लगभग 25 घंटे का परीक्षण बाकी है यह परीक्षण वास्तविक दुनिया की स्थितियों में इंजन के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए महत्वपूर्ण है ऐसे में भारत के लिए स्वदेशी जेट इंजन का निर्माण बेहद जरूरी है
मित्रों अपनी जानकारी कमेंट बॉक्स में आवश्यक बताया धन्यवाद

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