नमस्कार मित्रों भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि कुत्ते को एक टुकड़ा रोटी खिलाने से क्या लाभ होता है शायद आप लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे कुत्ते ने भगवान से क्या मांगा था?
मित्रों एक बार की बात है भगवान श्री कृष्णा गोलोक मे विश्राम कर रहे थे तभी घूमते घूमते द्रौपदी उनके पास पहुंच जाती हैं और कहती हैं हे प्रभु आप संसार की हर कीमती चीजें के बारे में जानते हैं आप ही मनुष्यों के दुख हरता हो तथा आप ही संसार के कल्याणकारी हो तो है प्रभु मैं आपसे एक प्रश्न जानना चाहती हूं
मित्रों तभी भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे देवी द्रौपदी आपके मन में जो भी प्रश्न है आप बिना संकोच होकर पूछ सकती है हम आपके प्रश्नों के उत्तर अवश्य ही देंगे तभी द्रौपदी कहती हैं हे प्रभु मैं यह जानना चाहती हूं कि कुत्ते को एक टुकड़ा रोटी खिलाने से मनुष्यों को कौन सा फल मिलता है तभी भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी कुत्ते के बारे में तो आपको भली-भांति जानती हो आप ही ने कुत्ते को श्राप दिया था
दोस्तों आगे द्रौपदी कहती है हे प्रभु हां मैं कुत्तों को श्राप अवश्य दिया था परंतु कृपया आप मुझे यह बताने कि कृपा करें की कुत्ते को रोटी खिलाने से मनुष्य को क्या फल मिलता है दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रोपती कुत्ते को एक टुकड़ा रोटी खिलाने से मनुष्य को आठ फायदे होते हैं तथा जो भी मनुष्य इन फायदो के बारे में जान लेता है उसका जीवन धन्य हो जाता है और उसके जीवन में कभी दुखों का पहाड़ नहीं टूटता है जो भी मनुष्य पृथ्वी लोक पर कुत्ते को एक टुकड़ा रोटी खिलाता है उसे यह आठ फायदे आवश्यक र्पाप्त होते हैं और वह जीवन भर सुखी रहता है
इसके अलावा उसे मृत्यु के बाद शीघ्र उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है तो मित्रों वह कौन से आठ बातें हैं आईए जानते हैं इस वीडियो के माध्यम से दोस्तों भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी अक्सर मनुष्य कई मौके पर कुत्ते का नाम लिया करते हैं किसी को गाली देते हैं तो जुबान पर उनके कुत्ते का नाम आता है वे गाली मनुष्य को देते हैं पर नाम कुत्ते का बदनाम होता है तो क्या कुत्ते का जीवन इतना गया गुजरा है दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे
द्रौपदी एक लाल रंग का कुत्ता था वह बहुत ही लाचार था और भूखा प्यासा था वह गांव में सभी के घर-घर जाता है किंतु उसे कोई भी एक टुकड़ा रोटी नहीं देता है वह भूख के मारा इधर-उधर भटकता रहता था एक दिन की बात है वह घूमते घूमते एक नदी के किनारे एक ब्राह्मण के आश्रम के पास पहुंच जाता है तभी ब्राह्मण से कहता है ही ब्रह्मण देव हमें लगता है आप बहुत ही विद्वान तथा ज्ञानी ब्राह्मण हैं और हम भूख प्यास से बहुत व्याकुल हैं
कृपया करके आप हमें एक टुकड़ा रोटी दे दें ताकि हम खाकर अपनी भूख को शांत कर सके तभी वह ब्राह्मण कहता है हे स्वान क्या तुम्हें गांव में किसी ने एक टुकड़ा रोटी नहीं दिया जिसे तुम खाकर अपनी भूख मिटा सको दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी वह कुत्ता ब्राह्मण से कहता है हे ब्रह्मण देव मैं आपको क्या बताऊं
आप मेरी बातों पर यकीन नहीं करेंगे तभी वह ब्राह्मण कहता है हे स्वान तुम अपनी बात बताओ तुम्हारे बातों पर हम विश्वास अवश्य करेंगे हमें तुम बहुत ही लाचार दिखाई पड़ते हो तभी वह कुत्ता कहता है ठीक है ब्रह्मण देव हम तुम्हें अपनी बीती बातें बताते हैं दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी वह कुत्ता ब्राह्मण से कहता है हे ब्रह्मण देव दुनिया के लोग हम पर रहम करो हमारा कोई घर नहीं होता कोई आसरा नहीं होता कमाकर के खाने हमें नहीं आता हमें वस्त्र भी पहनने का ज्ञान नहीं है
इसीलिए सर्दी गर्मी बरसात में हम ऐसे ही घूमते रहते हैं हमें पढ़ना लिखना भी नहीं आता दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं है द्रौपदी वह कुत्ता कहता है हे ब्रह्मण देव आपकी तरह हमें अनुशासन नहीं आता हमें आपकी तरह बोलना नहीं आता यह हमारा दुर्भाग्य ही समझिए हमें आपकी तरह भूख भी लगती है और चोट लगने पर हमें भी आपकी तरह दर्द। होती है हमें भी आपकी तरह रोना भी आता है बस इन्हीं तीन कामों में हम आपकी बराबरी करते हैं
इसीलिए हम पर दया दिखाइए हमें और कष्ट मत दीजिए ईश्वर ने तो हमें वैसे भी कष्ट देकर ही भेजा है ऊपर से आप लोग हमें परेशान करते हैं हम आपकी तरह मनुष्य नहीं है हम पराधीन जीव हैं हमारा जन्म होते ही हमारे आंखों और कान बंद होते हैं और हम कुछ नहीं कर सकते की जन्म के समय किस प्रकार का स्वागत हुआ हालांकि कई लोग मानते हैं की जन्म के समय सुखी के मौके पर नाच गान होता है
लेकिन हमारे जन्म पर कौन खुशी मनाए यह तो कोई भी नहीं जानता हमारे जन्म पर भी यह सब हो सकता है लेकिन जब हमारी आंखें खुली तो मैंने देखा कि हमारी मां जिसे आप लोग कुतिया कहते हो वह अपने चार बच्चों को छाती से चिपका कर एक भारी राख के बीच पड़ी थी हम चार भाई थे बाकी तीन भाई तो सफेद और भूरे रंग के थे मैं अकेला लाल रंग का था सबसे छोटा मैं ही था इसीलिए कमजोर भी था मेरी मां हम लोगों के पास जब तब आती थी क्योंकि उसे भी अपने
भोजन की व्यवस्था करनी पड़ती थी यदि वह ना खाती तो हमें दूध कहां से पिलाती हम चारों उस एक मां के। आश्रित थे जो हमें हमेशा अपना परिवार समझती थी वह बेचारी अपने भोजन के लिए इधर-उधर दौड़ती रहती थी कभी भोजन मिल भी जाता था कभी नहीं मिलता था लेकिन वह हमेशा हम चारों का बड़ा ख्याल रखती थी आखिर मां जो थी वह रात-रात भर जाग कर गांव की रखवाली करती थी मजाल नहीं था कि कोई
अनजान आदमी बुरी नीयत से गांव की ओर भी झांक जाए दूसरे गांव के कुत्ते भी हमारी मां के दर से गांव में नहीं आते थे गांव के किसी किसान के खेत में कोई खड़ी फसल खाने आता तो हमारी मां उसे दौड़कर भगा देती गांव वालों के लिए इतना सब करने के बाद भी कोई हमारी मां को भोजन नहीं देता था
उसके लिए उसे मजबूर होकर छीना झपटी करनी पड़ती थी कई बार तो लोग उसे लाठी डंडों से पीटकर भगा देते थे बेचारी उस दिन भूखी रहकर पेट की आग से जलती रहती थी दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं है द्रौपदी वह कुत्ता कहता है हे ब्रह्मण देव आखिर भूख तो हमें आपके ही तरह लगती है
ऊपर से उसे अपने चारों बच्चों की चिंता भी लगी रहती थी आखिर मां जो थी जब भूख उसे चैन से बैठने नहीं देती और गांव वालों का भी उसे देखकर ह्रदय नहीं पसीजता तो बेबस होकर के उसे लोगों के घरों में चोरी से घोषणा पड़ता था और खाने की कोई चीज मिल जाति तो उसे खाकर अपने पेट की आग बुझा लेती थी वह कुत्ता ब्रह्मण से कहता है हे ब्रह्मण देव हमारी मां ने क्या बिगाड़ा था उसेने तो सिर्फ अपने पेट के लिए भोजन ही तो चुराया था चोरी करने का हमें कोई शौक नहीं है पर पापी पेट हमें यह सब करने के लिए मजबूर कर देता है यह कथा बड़ी गहराई से मनुष्य के अनुभवों को दर्शाती है
वह कुत्ता सही कह रहा है भूख का दर्द किसी को भी अनजान नहीं होता और अपने पेट के लिए कुछ करना हमेशा वह मानवीय अनिवार्यता होती है वह कुत्ता ब्राह्मण से कहता है ब्रह्मण देव आप अब तो देख रहे हैं वह दिन कितना भयानक थी बड़ी ठंडी बरसात और हमारे दो भाई मर गए उस दिन हमारी मां बहुत रोई लेकिन मनुष्य हमारी पीड़ा को समझेगा उसके बच्चे तो थोड़े ही मारे हैं दोस्तों फिर वह कुत्ता कहता है हे ब्रह्मण देव अब हम सिर्फ दो भाई रह गए थे
हमारी मां हम दोनों की अच्छे से देखभाल करनी लगी थी एक दिन उसी गांव में एक सेठ के घर पर दावत चल रही थी और पुड़िया बन रही थी सेठ के घर काफी मेहमान आए हुए थे हमारे मां कुछ खाने की तलाश में बार-बार उधर जाती थी लेकिन लोग उसे दुत्कार कर भगा देते किसी को उस पर इतना तरस नहीं आया कि एक पूणी उस बेचारी को खाने को फेंक दे देते एक पूणि से उनका क्या बिगड़ जाता मेरी मां ललचा ललचा कर रह जाती थी
और वही खड़ी-खड़ी देखती रहती मेरी मां सेठ के आंगन में दावत खाने का सिलसिला चालू हुआ भोजन परोसा जाने लगा मेरी मां भी वही जाकर पूछ हिलने लगी खाना परोसने वाला आदमी जब किसी काम से भीतर गया तो मेरी मां दबे पांव पूड़ी लेने के लिए आगे बढ़ी फिर एक धक-धक की आवाज होने लगी चारों ओर से लोग चिल्ला चिल्लाकर ऐसे भागने लगे कि मेरी मां को भी घबराहट महसूस हुई और उन्हें डंडों से धमका कर पीछे भागाना पड़ा वे वहां से निकलने की कोशिश कर रही थी
लेकिन रास्ता बंद था क्योंकि सामने लोग डंडों के साथ आ रहे थे तभी उन्होंने वहां पर भोजन कर रहे लोगों को लांग कर के भागने का फैसला किया और लॉग करके बाहर निकल गई दोस्तों आगे वह कुत्ता कहता है ही ब्रह्मण देव मेरी मां अपने निकलने पर इतनी हैरान नहीं थी जितनी कि उन लोगों को देखकर हुई थी जो वहां पर दावत खा रहे थे वह सब उठकर खड़े हो गए उन्होंने भोजन करना छोड़ दिया और कहने लगे कि कुत्ते के लागने के कारण भोजन भ्रष्ट हो गया है
सब एक दूसरे से विचार कर रहे थे कि अब क्या किया जाए खाना तो सब खराब हो गया बेचारा वह सेठ फूट-फूट कर रोने लगा कुछ लोग तो यह भी कह रहे थे भाई कुटिया के लागने से भोजन खराब कैसे हो गया उसने खाने में या पतलो में मुंह थोड़ी ही डाला है सिर्फ ऊपर से निकल ही तो गई है और कहने लगे शहरों में तो लोग कुत्ते को पालकर घर के अंदर सुलाते भी हैं और खिलाते भी हैं तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है अगर कुटिया लांग गई है तो भोजन खराब नहीं हुआ है
लेकिन उनमें कुछ लोग बड़े घरों से ताल्लुक रखते थे उन्होंने एक भी नहीं चलने दी और कह रहे थे कि भोजन तो भ्रष्ट हो गया यह हमारे खाने के लायक नहीं है आखिरकार उनकी बात मानी गई अब तो वह सारा भोजन गरीबों में बांट दिया गया उस दिन तो मेरी मां को खूब पेट भर के खाना मिला था ऐसा सुखी उसने जीवन में कभी नहीं मिल पाया था लेकिन वह सुखी उसके लिए बड़ी मुसीबत बन गई थी
वह भोजन करके वहां आराम से लेटी थी लेकिन तभी सेठ डंडा लेकर वहां आ पहुंचा और उसे बुरी तरह से पीटने लगा उसे बाहर से भागने का भी कोई अवसर नहीं मिल पाया डंडों की चोट से वह बुरी तरह चिल्लाने लगी मां का विलाप को सुनकर पत्थर भी पिघल जाता है पर उस निर्दय को कोई भी रहम नहीं आया वह
उसे कठोरता पूर्वक से पिटता रहा मां को पिटने कि चिख पूरे गांव में सुनाई दे रहा था तब कुछ लोग आए और उसे समझा कर बोले भाई जाने दो भूख में तो आदमी की भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है वह तो एक पशु है उसे अच्छे बुरे का क्या ज्ञान अब उसे मारकर आपको क्या मिलेगा जो होना था सो हो गया लोगों के
समझाने के बाद उसने हमारी मां को पीटना बंद किया मां ने आकर सारी कहानी हम दोनों भाइयों को सुनाई हमने सोचा कि कितना कष्ट भरा है हम कुत्तों का जीवन आदमी एक रोटी के टुकड़े के बदले एक चोर के जितना पिटता है धिक्कार है ऐसे लोगों पर जो हम लोगों की पीड़ा को नहीं समझते दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे
द्रोपती वह कुत्ता कहता है हे ब्रह्मण देव एक दिन की बात है एक बाहर का मुसाफिर आकर ठहरा हुआ था उसने अपने भोजन के लिए एक जगह चूल्हा बनाया था और उस पर दाल बनने के लिए रखा था उसके बाद आटा गूंद कर रख दिया था और वहीं पास में कुएं पर पानी लेने चला गया इधर कहीं से मेरी मां भी घूमती हुई वहीं पहुंच गई उसने गुथे हुए आटे को रखा देखा तो सोचा कि शायद इस आटे का कोई मालिक नहीं है
यही सोचकर वह उस आटे को खाने लगी उधर राहगीर ने कुएं के पास से देखा कि उसका आटा एक कुत्तिया ने आकर खा लिया है तो वह बड़ा दुखी हुआ और वह बेचारा माथे पर हाथ धरकर रोने लगा क्योंकि वह भी दो-तीन दिनों का भूखा और थका हुआ था कुछ लोगों ने उसे कहा अरे भाई इसने तुम्हारा भी आटा बिगाड़ दिया कल तो इसने सेठ की पूरी रसोई ही बिगाड़ कर रख दी मुसाफिर दुखी होकर बोला भाई मुझे क्या मालूम था
यह दुष्ट कुटिया मेरे आटे को खाने के लिए घात लगाए बैठी है मुसाफिर ने बिना सोचे समझे लाठी लेकर कुटिया के ऊपर टूट पड़ा मां उस आटे को ठीक से खा भी नहीं पाई थी पर उससे ज्यादा कि उसे पर लाठी बरस गई महीनों तक मेरी मां लगड़ती हुई घूमती रही दोस्तों तब उसे दिन समझ में आया कि आदमी कितना खुदगर्ज है
हम उसकी कितनी भी कार्य करते हैं तो भी वह हमारी पीडा को नहीं समझता दोस्तों जो हमें कष्ट देता है जो हमें प्यार से खिलाता है हम उसके कितने काम आते हैं यह उन्हें नहीं पता उसके घर की रखवाली तो करते ही हैं साथ ही साथ और भी बहुत सारे लाभ हैं जिन्हें मनुष्य नहीं समझता दोस्तों आगे भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी यदि मनुष्य कुत्ते को रोटी खिलाने के फायदे जान जाए तो बहुत से अपने जीवन में होने वाले नुकसान से बच सकता है मैं
आज आपको बताऊंगा कुत्ते को रोटी खिलाने के आठ फायदे बताऊंगा यह मनुष्य को पता नहीं है कि जब भी घर में रोटी बनाई जाती है तो सबसे पहली रोटी गाय को दी जाती है और अंतिम रोटी कुत्ते की होती है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी ऐसा ही हमने विधान बनाया था लेकिन भगवान की बनाई उसे विधान को भूलकर मनुष्य अगली और पिछली रोटी स्वयं ही खा जाता है इसका प्रभाव उसके जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है कुत्ता वह प्राणी है
जिसको रोटी खिलाने से मनुष्यों के जीवन में पढ़ने वाले ग्रहों के दोष भी दूर हो जाते हैं हमें धर्म परायण जीवन जीना चाहिए ताकि हमारे जीवन में सुख और समृद्धि हो दोस्तों फिर
1>भगवान श्री कृष्ण कहते हैं हे द्रौपदी पहला फायदा है कुत्ते को रोटी खिलाने का दोस्तों कुत्ते को रोटी खिलाने से शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है शनि ग्रह जब अपनी कुदृृष्टि डालता है तो हर मनुष्य बर्बाद हो जाता है जिस व्यक्ति पर उनकी महादशा का आरंभ हो जाता है तो बने काम अपने आप बिगड़ने लगते हैं वह आर्थिक तंगी का शिकार हो जाता है उसे स्थिति में व्यक्ति यदि कुत्ते को रोटी खिलाता है तो उस पर शनि का को प्रभाव बहुत कम हो जाता है
2> दोस्तों दूसरा फायदा है कि कुत्ते को रोटी खिलाने से भाग्य आपके पक्ष में हो जाता है और आपके घर के अंदर नकारात्मक शक्ति नष्ट हो जाती है
3>तीसरा फायदा कुत्ते को रोटी खिलाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती है और आपके घर में धन दौलत की कभी कमी नहीं रहती और धन और संपत्ति के स्रोत को बढ़ावा देते हैं
4>चौथा फायदा कुत्ते को रोटी खिलाने से आपके ऊपर कर्ज नहीं चढ़ता और जो पहले से आप कर्जदार हैं उन्हें भी मुक्ति मिल जाती है
5> पांचवा फायदा है कुत्ते को सुबह शाम भोजन देने से आपका व्यापार बहुत अच्छे से चलता है यह आपके व्यवसाय में लाभ की वृद्धि करता है और उसे समृद्धि की दिशा में अर्गसर बनाता है
6>छठ फायदा है कुत्ते को रोटी देने से आपकी आयु में वृद्धि होती है और अटका हुआ धन वापस मिल जाता है और आपके जीवन की उच्च आयु में आनंद और संपत्ति का अनुभव करने का अक्सर प्रदान करता है
7>सातवां फायदा है कुत्ते को रोटी देने से हमेशा आपका स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है और मानसिक रूप से आप मजबूत रहते हैं मन ऊर्जावान रहता है और अच्छे विचार आपके मन के अंदर आते हैं
8> आठवां फायदा कुत्ते को रोटी खिलाने से भगवान प्रसन्न रहते हैं क्योंकि भगवान को समस्त जीवों की समस्त प्राणियों की चिंता रहती है और जो समस्त जीवों पर दया दिखता है भगवान भी उस मनुष्य से हमेशा प्रसन्न रहते हैं भगवान की कृपा सदैव उस परिवार पर बनी रहती है धर्म और निष्ठा के प्रतिक के रूप में भगवान सदेव उन लोगों के साथ है
जो प्राणियों के प्रति दया भाव रखते हैं ऐसा कहा जाता है क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि कुत्ते के रोने की अशुभ घटनाएं होती है जैसे किसी की मृत्यु या संकट यह एक पौराणिक विश्वास है और अनेक समुदायों के प्रचलित है यह विश्वास लोगों की मानसिकता पर आधारित होती है और
विश्वास के आधार पर ऐसे कार्य किए जाते हैं इसलिए कभी भी कुत्ते को रुलाना नहीं चाहिए दोस्तों इस प्रकार से भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी को कुत्ते को रोटी खिलाने के फायदे इस कहानी के द्वारा बताएं
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