नमस्कारमित्रो आपकी नजर में इस दुनिया में सबसे बड़ा पापी कौन है स्त्री या पुरुष अगर आपको नहीं पता होगा तो इस कहानी को जरूर सुनिए इसके बारे में आपको पता चल जाएगा कि भगवान श्री कृष्ण की नजर से सबसे बड़ा पापी कौन है स्त्री या पुरुष
मित्रों सबसे बड़ा पापी कौन है?संसार में सबसे बड़ा पापी कौन है स्त्री या पुरुष एक जंगल में एक तोता और मैना प्रेम पूर्वक आपस में मिलकर रहा करते थे उनमें बहुत प्रेम था एक दिन किसी विवाद के कारण तोता और मैना के बीच लड़ाई हो गई तोते ने कहा कि इस संसार में सबसे बड़ी पापी और विश्वासघात स्त्री ही होती है मैना ने जवाब दिया कि इस संसार में सबसे ज्यादा पापी और विश्वासघाती पुरुष हि होते हैं

वे दोनों आपस में लड़ते रहे और अपने विवाद के निवारण के लिए वे भगवान श्री कृष्ण के पास गए और अपनी अपनी बात बताई तब श्री कृष्ण ने तोते से कहा तुम कैसे कह सकते हो कि संसार में स्त्री पुरुषों की अपेक्षा बहुत ज्यादा पापी और विश्वासघाती होती है मित्रों अगर आप यह कथा सुन रहे हैं तो पूरा सुनिए इस कथा को आधा अधूरा छोड़कर जाने की गलती मत करिएगा क्योंकि इस पवित्र कथा को पूरा सुनने से मनचाहे फल की प्राप्ति होगी और आपको बहुत ही बड़ा ज्ञान मिलेगा इसलिए इस कथा को पूरा जरूर सुने आप कृष्ण भक्त हैं तो कान्हा का अनादर ना करें
भगवान श्री कृष्ण से तोता बोला प्रभु मैं आपको एक कहानी सुनाना चाहता हूं जिससे हम सबको यह साबित होगा कि स्त्री पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पापी और विश्वास घाती होती है फिर भगवान श्री कृष्ण बोले ठीक है तुम कहानी सुनाओ तोता कहानी शुरू करने वाला ही होता है कि तभी माता लक्ष्मी आ जाती है और कहती है प्रभु मुझे भी यह कहानी सुननी है

मैं भी सुनना चाहती हूं तब भगवान कृष्ण कहते हैं ठीक है बैठो आप भी सुन लो फिर तोता भगवान श्री कृष्ण और माता लक्ष्मी के सामने कहानी सुनाने लगता है तोता कहता है कि एक राज्य में चंद्रहुसेन नामक राजा राज्य करता था उसके पास चार बेटे थे जो सभी बहुत ही बहादुर और प्रतापी थे लेकिन सबसे बड़ा बेटा जिसका नाम चंद्रभान था वह ना केवल प्रतापी बल्कि बहुत ही सुंदर भी था उसकी पत्नी प्रभावती भी बहुत ही सुंदर और रूपवान थी
वह अपने आगे किसी दूसरी स्त्री को सुंदर नहीं मानती थी और एक दिन राजा चंद्रहुसेन ने अपने बेटे चंद्रभान को उसकी किसी बात पर नाराज होकर राज्य से निकाल देने का आदेश दिया और राजा का यह आदेश सुनकर के सभी इस बात से चिंतित हो गए कि फिर चंद्रभान अपने महल में गया और उदास हो गया उधर चंद्रभान को उदास देखकर उसकी पत्नी ने पूछा हे
प्राणनाथ आप उदास क्यों है आप इतने मुरझाए हुए क्यों हैं राजकुमार होकर भी आप इतने चिंतित क्यों हैं तब चंद्रभान सोचने लगा कि मैंने बहुत बुरा किया है और अपनी सारी बात अपनी पत्नी को बता दी उसी समय उसकी पत्नी मूर्छित हो जाती है फिर दासिया ने प्रभावती प्रभावती पर ठंडा पानी का छिड़काव किया तब जाकर वह होश में आई अब होश में आकर

प्रभावती ने अपने पति राजकुमार चंद्रभान से कहा आप मुझ दासी को छोड़कर अन्य प्रदेश चले जाएंगे तो मैं आपके बिना कैसे जी पाऊंगी मैं भी आपके साथ ही चलूंगी तब राजकुमार चंद्रभान कहता है तुम मेरे साथ कैसे चल सकती हो क्योंकि दूसरे राज्य में अनेक प्रकार के संकट भी आते हैं और तुम नाजुक महलों में रहने वाली महलों के बिना यह कष्ट कैसे बर्दाश्त कर पाओगी फिर तो राजकुमार चंद्रभान की बात को सुनकर राजकुमारी प्रभावती कहती है हे
केशव जितने भी दुख दूसरे राज्य में आएंगे वह सब हमारे साथ होते हुए सुख ही लगेंगे लेकिन महल के सुख बिना आपके जंगल के दुखों से भी अधिक डरावने लगेंगे इसलिए मैं भी आपके साथ चलूंगी अब तोता कहता है हे प्रभु राजकुमारी प्रभावती की आंखों में आंसू देखकर चंद्रभान ने मन ही मन में सोचा कि वह मेरे बिना नहीं रह सकती इसीलिए मुझे इसको तड़पते हुए छोड़कर जाना सही नहीं होगा और इन सभी बातों को सोचते हुए

राजकुमार चंद्रभान अपनी पत्नी प्रभावती से कहतू हैं तुम उदास नहीं होना हम तुम्हें अपने साथ लेकर जाएंगे इस बात से प्रभावती खुश हो जाती है और अपने पति के साथ जाने की तैयारी करने लगती है और अगली सुबह वे राज्य से बाहर निकलकर एक जंगल में पहुंचते हैं चलते चलते थक जाते हैं और फिर वे एक बरगद के वृक्ष के नीचे विश्राम करने का निर्णय लेते हैं वे बहुत थके हुए थे
ठंडी हवा के झको में उन्हें तुरंत नींद आ गई परंतु कुछ देर बाद वहीं पर एक सांप ने प्रभावती को काट लिया फिर तोता कहता है हे प्रभु आगे सुनिए सांप के डसने से राजकुमारी तड़पने लगी और चंद्रभान की आंख खुल गई राजकुमारी को तड़पता हुआ देखकर और सांप को जाता हुआ देखकर
चंद्रभान बेचैन हो गए फिर कुछ देर बाद राजकुमारी की मौत हो गई इस प्रकार मृतक राजकुमारी को देखकर चंद्रभान ऊंचे स्वर में रोने लगे फिर चंद्रभान ने मन में सोचा अब जब जीवन साथी ही मर गई है तो मैं जीकर क्या करूंगा मैं इसी जंगल में अपने प्राण त्याग दूंगा ऐसा मन में सोचकर वह प्रभावती के शव के पास से उठता है

और जंगल से लकड़ियां इकट्ठी करने लगता है और रोकर कहता है कि मैं भी प्रभावती की चिता में जलकर मर जाऊंगा लेकिन तभी उसी समय स्वर्ग से धर्मराज आते है और चंद्रभान को रोते हुए देखकर उसके मन में दया आती है वह राजकुमार चंद्रभान के पास जाता है और पूछता है कि तुम क्यों रो रहे हो आखिरकार तुम्हारा दुख क्या है तो
राजकुमार चंद्रभान ने धर्मराज से कहा मेरे पास अपना दुख कहने की हिम्मत नहीं है मुझे चाहिए कि यह धरती फट जाए और मैं इसमें समा जाऊं फिर धर्मराज ने कहा तुम मुझे अपना हाल बताओ शायद मैं तुम्हारी मदद कर सकूं फिर चंद्रभान ने कहा महाराज मैं एक राजकुमार हूं और राजा चंद्रहुसेन का बेटा हु मेरे पिता ने मुझे राज्य छोड़ने के लिए कहा था इसलिए मेरी पत्नी और मैं इस जंगल में चलते-चलते यहां आ गए यहां आकर मेरी पत्नी को सर्प ने काट लिया है

और उसकी मृत्यु हो गई और मैं लकड़ियां इकट्ठा कर रहा हूं ताकि मैं अपनी पत्नी के साथ ही जलकर अपने आप को भी अग्नि के हवाले कर सकूं तब तोता कहता है हे प्रभु आगे सुनिए चंद्रभान की बातों को सुनकर धर्मराज कहते हैं राजकुमार तू बड़ा मूर्ख है यह संसार है यहां इंसानों का आना-जाना लगा रहता है और इस शरीर को एक न एक दिन सबको त्यागना हि पड़ेगा तू भी इसे जानता है
इस संसार में कोई भी किसी के साथ नहीं आता और ना ही किसी के साथ जाता है फिर भी तुम मूर्खों की तरह यह बात कर रहे हो अगर तू जीवित रहेगा तो बहुत सारी प्राणिया तुझे मिलेगी इसलिए मेरे कहने पर मरने का विचार छोड़ दो इस मानव शरीर को प्राप्त करने के लिए देवता भी बेहद इच्छुक होते हैं
तो फिर इस शरीर को क्यों नष्ट करना चाहता हो इस प्रकार धर्मराज के शब्दों को सुनकर चंद्रभान कहता है महाराज आपने जो कुछ कहा है वह सत्य है किंतु ऐसी पतिव्रता पत्नी मुझे किसी जन्म में भी नहीं मिलेगी इसलिए मैं इसके साथ ही मरना चाहता हूं और चंद्रभान का विचार को सुनकर धर्मराज ने जान लिया कि यह अपनी पत्नी के बिना नहीं रह सकता है तब धर्मराज ने चंद्रभान से कहा हे राजकुमार तेरी पत्नी को जीवित करने के लिए केवल एक ही उपाय है

और अब तुम मेरी बात को ध्यान से सुनो यदि तू इस उपाय को कर सकता है तो तेरी पत्नी जीवित हो सकती है फिर चंद्रभान ने कहा महाराज आप जो कुछ भी कहेंगे वह सब करने के लिए तैयार हूं केवल मेरी पत्नी को जीवित कर देना तब धर्मराज ने कहा तुम्हारी पत्नी की आयु केवल बिस वर्ष कि थी और इसे इसने बिता दिया है
इसके बदले तुम्हारी उम्र शत्तर वर्ष की है जिसमें से तिस वर्ष बीत चुके हैं तेरे जीवन काल में चालीस वर्ष अभी बाकी है यानी तुझे चालिस साल और जीने का अवसर है यदि तू अपनी पत्नी को आधा अपने जीवन का समर्पण कर देता है तो तुम दोनों की आयु समान हो जाएगी अगर तुम यह मान लो तो राजकुमारी जल्द ही ठीक हो जाएगी इस तरह
धर्मराज की बात सुनकर राजकुमार चंद्रभान ने कहा मैं सहमत हूं फिर धर्मराज ने चंद्रभान के हाथ में पानी दिया और बिस वर्षों के लिए राजकुमारी के पैरों पर पानी डालने का संकल्प लिया अब जैसे ही चंद्रभान ने संकल्प किया कि वह जल को रानी के पैरों पर डालेगा धर्मराज ने कह दिया और पानी को पैरों पर डालने से कहा पहले मेरी एक बात को ध्यान से समझ लो इसमें एक गुप्त रहस्य भी है अभी तो तुझे राजकुमारी की आवश्यकता है

तुम पानी डालकर उसको बचा सकते हो लेकिन भविष्य में अगर राजकुमारी की आवश्यकता नहीं पड़ती है तो तुम अपने संकल्प को वापस भी ले सकते हो और जब तुम यह संकल्प वापस लेते हो तो तुम्हारी पत्नी की तुरंत ही मौत हो जाएगी परंतु एक बात हमेशा याद रखना इस संकल्प को कभी वापस ले सकने की बात राजकुमारी से मत कहना वरना तुम अपने संकल्प को वापस नहीं ले सकते हो
और हमेशा याद रखना जीवन में कुछ बातें हमेशा छुपाकर रखनी चाहिए क्योंकि कभी-कभी यह बात काम आ सकती है फिर तो ऐसा कहकर और उस रानी के सामने ना आकर वह धर्मराज जो थे अंतरध्यान में चले गए और प्रभावती को होश आ जाता है त तब चंद्रभान राजकुमारी से कहता है तुम सो गई थी और बहुत थकी हुई थी
इसलिए मैंने तुम्हें नहीं जगाया इस प्रकार राजकुमार चंद्रभान ने अपनी पत्नी से सारी बातें छुपा ली कि सर्प ने तुम्हें काट लिया था और तुम मर गई थी मैंने तुम्हें फिर जीवित कैसे किया है यह सब राजकुमार ने अपनी पत्नी से छुपा लिया फिर तोता बोला प्रभु फिर वह दोनों आगे बढ़े गए कई दिनों बाद उन्होंने एक बहुत ही सुंदर स्थान देखा वहां पर एक साधु की कुटिया थी
जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवा साधु शांति से बैठकर कोई साधना कर रहा था वे दोनों बहुत ही थके हुए थे इसलिए वे साधु के पास बैठ गए उस समय राजकुमार ने अपनी पत्नी से कहा राजकुमारी हमें प्यास लगी है हम कुएं पर जाकर पानी पी लेते हैं अगर तुम भी प्यासी हो तो तुम्हारे लिए भी पानी ले आते हैं

तब राजकुमार की बात को सुनकर प्रभावती ने कहा मुझे तो प्यास नहीं लगी है आप जाइए और पानी पी आइए इसके बाद राजकुमारी का जवाब सुनकर राजकुमार चंद्रभान एक लंबी रस्सी लेकर कुएं की ओर जाते हैं चंद्रभान पानी पीने पहुंचे तो राजकुमारी प्रभावती उस साधु की ओर देखती है प्रभावती साधु की सुंदरता को देखकर उस पर मोहित हो गई अर्थात वह उसको दिल दे बैठी थी
अब वह साधु से कहती है कि हे महोदय आप तो यहां बहुत खुशी से रहते हैं साधु ने कहा तुम भी मेरे साथ रह सकती हो लेकिन तुम्हारे पति भी साथ में है तो हम कैसे तुमको रख सकते हैं इसके बाद राजकुमारी प्रभावती ने साधु के सामने अपनी प्रेम लीला प्रकट की तो साधु ने कहा मैं एक उपाय बताता हूं
तुम अपने पति को जिस कुएं में वह पानी पीने गया है उसी कुएं में धकेल देना फिर जो होगा हम देख लेंगे फिर साधु की बात सुनकर प्रभावती ने कहा ठीक है मैं ऐसा ही करूंगी अब इतनी ही देर में राजकुमार चंद्रभान पानी पीकर राजकुमारी के पास आया तो वह कहने लगी मुझे भी अब प्यास लग रही है

कुएं पर वापस चलकर मुझे भी पानी पिलाओ तो राजकुमार चंद्रभान बोला मैंने तुमसे पहले ही पूछा था और तुमने मना कर दिया था खैर अगर तुमको प्यास लगी है तो मैं अभी पानी लेकर आता हूं तब चंद्रभान पानी लेने चला तो प्रभावती भी उसके साथ चल दी और कहने लगी मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूं बेचारा चंद्रभान तो उसके प्रेम में पागल था उसको क्या मालूम था
कि यह मेरे प्राण लेने के लिए मेरे साथ आ रही है मित्रों वास्तव में विद्वान सच कहते हैं कि स्त्रियों के चरित्र को देवता भी नहीं जान सकते मानव क्या चीज है उनके जाल में अच्छे अच्छे बुद्धिमान भी फंस जाते हैं जब राजकुमार चंद्रभान कुएं पर जाकर पानी भरने
के लिए बाल्टी डालता है तो भौतिक अपने पति यानी राजकुमार चंद्रभान को धक्का देकर कुएं में गिरा देती है
और खुद उस साधु के पास चली जाती है वह साधु राजकुमारी को अपने साथ ले जाकर एक राज्य में बस जाता है वहां दोनों खुशी से रहने लगते हैं साधु ने फिर प्रभावती को ऐसा नाचना और गाना सिखाया कि वह नृत्यांगना के रूप में मशहूर हो गई और धीरे-धीरे वह राजकुमारी पूरे नगर में प्रसिद्ध हो गई इस तरह प्रभावती के नृत्य और गीत के कारण उस

भिक्षु के पास लाखों रुपए बन गए राजकुमारी भी उस साधु के साथ मस्ती में रहने लगी जिस समय प्रभावती ने अपने पति चंद्रभान को कुएं में धकेल दिया था तब संयोग से एक जंजीर जो कुएं में लटकी थी उसे चंद्रभान ने पकड़ लिया था और उसको पकड़कर कुएं में लटकता रहा ईश्वर को याद करते हुए वह सोचने लगा क्या यही मेरे प्यार की सजा है
कुछ समय बाद बंजारों का एक काफिला वहां आया काफिले में से एक बंजारा बाल्टी लेकर कुएं का पानी भरने लगा जब उसने पानी में बाल्टी डाली तब चंद्रभान ने उसकी बाल्टी को हाथ से पकड़ लिया बंजारा यह देखकर चौक गया और पूछा तुम कौन हो राजकुमार चंद्रभान ने कहा भाई मैं अटका हुआ हूं मुझे यहां से निकालो और मेरी जान ब बचाओ मैं सारी जिंदगी आपके उपकार को नहीं भूलूंगा और ऐसा कह कर के
राजकुमार चंद्रभान बंजारे से प्रार्थना करने लगा फिर राजकुमार चंद्रभान के दुख को देखकर बंजारे को उस पर दया आ गई और उसने चंद्रभान को कुएं से बाहर निकाल लिया और फिर पूछा ए भाई तुम कौन हो तुम इस कुएं में कैसे गिरे तुम मुझे अपना हाल बताओ तब चंद्रभान ने कहा भाई मैं अपना हाल आपसे कैसे कहूं जो मुश्किलें मेरे साथ हुई है

भगवान ना करें किसी के साथ ऐसा हो फिर चंद्रभान ने कहा यदि तुम मुझसे जानना ही चाहते हो तो मैं आपको अपनी कहानी सुनाता हूं मैं एक राजकुमार हूं मेरे पिता ने मुझे राज्य से निकाल दिया था इसलिए मैं अपनी प्रिय पत्नी के साथ एक जंगल में पहुंच गया मेरी पत्नी और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे
जंगल में एक सांप ने मेरी पत्नी को काट लिया जिससे उसकी मृत्यु हो गई मैं जब अपनी पत्नी के साथ मरने जा रहा था तब एक धर्मराज ने मुझ पर दया की और मेरी आयु के बिस वर्ष मेरी पत्नी को देने के बाद उसे पुण्य जीवित कर दिया फिर हम उस जंगल से आगे बढ़े कुछ दिनों बाद हम एक स्थान पर पहुंचे जहां एक साधु का डेरा था
मुझे प्यास लगी मैं पानी पीने गया जब मैं वापस आया तो मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि उसको भी प्यास लगी है मुझे भी पानी पिलाओ और इसी तरह कहकर मेरी पत्नी मेरे साथ उस कुएं पर आ गई मैं कुएं से पानी निकाल रहा था तो उसने मुझे पीछे से धक्का दे दिया कुएं में लटकी हुई यह जंजीर मेरे हाथ में आ गई जिससे मैं कुएं में गिरने से बच गया और फिर जब आप आए तो

मैंने आपको आवाज दी इसके बाद आपने मुझे कुएं से बाहर निकाला अब तोता बोला है प्रभु इस प्रकार राजकुमार चंद्रभान ने दुखी मन से सारा हाल उस बंजारे से कह दिया और फिर अपनी व्यथा सुनाकर चंद्रभान चुप हो गया उधर बंजारे ने उसकी बात को सुना और राजकुमारी की करतूत सुनकर दुखी होकर कहा कि
स्त्रियों का चरित्र भगवान भी नहीं समझ सकते तो मनुष्य कैसे समझ सकता है ऐसा कहकर बंजारे ने चंद्रभान के सिर पर हाथ फेरा और कहा तुम चिंता मत करो भगवान बड़े दयालु है वह तुम्हारी सहायता करेंगे फिर उसने और कहा तुम चाहो तो हमारे साथ कुछ दिन रुक सकते हो राजकुमार चंद्रभान उन बंजारों के साथ रहने को सहमत हो गया फिर उनकी सहायता से वह कुछ दिनों बाद उसी राज्य में पहुंचा जहां उसकी पत्नी प्रभावती और वह साधु रह रहे थे
उस राज्य को देखकर उसने बंजारे से कहा भाई मेरी इच्छा है कि तुमबंजारे कुछ दिन इस राज्य में रहो तब बंजारेने कहा जैसी आपकी मर्जी मुझे कोई आपत्ति नहीं है फिर राजकुमार चंद्रभान से विदा होकर राज्य में आया और काम की तलाश में घूमने लगा कुछ दिनों बाद राजकुमार की मेहनत परिश्रम देखकर उसे एक बड़े व्यापारी ने अपने पास नौकरी पर रख लिया इस तरह राजकुमार चंद्रभान ने उस व्यापारी के पास रहना शुरू किया था

और बड़ी मेहनत और प्यार से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना शुरू किया और यह देखकर उस व्यापारी ने चंद्रभान को बड़ा सम्मान दिया और उसे अपने यहां का मुनिब बना लिया और इस तरीके से राजकुमार चंद्रभान के दिन बड़ी खुशी खुशी गुजरने लगे अब एक दिन नगर के राजा के यहां प्रभावती के नृत्य का आयोजन हुआ राजा ने उस शहर के सभी बड़े व्यापारी और सेठों को अपने यहां नृत्य देखने के लिए आमंत्रित किया जब राजकुमारी प्रभावती का नृत्य होने वाला था
शहर के सभी व्यापारी और सेठ साहूकार राजा के यहां पहुंच गए चंद्रभान जो राजकुमारी के नृत्य और गायन की प्रशंसा सुनता था उसने भी सोचा कि मुझे इस नृत्य को देखना चाहिए वह भी राजा के दरबार में सेठ के साथ पहुंच गया राजकुमारी ने अप्सरा के समान नृत्य किया और अपनी सुरीली आवाज में कई सुंदर रागों को प्रस्तुत किया और उसके गाने को सुनकर महफिल के सभी लोग आश्चर्य में आ गए और सभी ने बहुत सारे इनाम दिए इसके साथ ही

राजा से लेकर प्रजा तक सभी ने उसकी प्रशंसा की राजकुमार चंद्रभान ने अपने हाथ की अंगूठी निकली जिसमें हीरा जड़ा हुआ था और उस अंगूठी को प्रभावती को भेंट कर दीया इसके बाद प्रभावती ने अंगूठी को पहचान लिया और मन ही मन में कहने लगी यह तो बहुत बड़ा आश्चर्य हो गया मेरा पति जिंदा है और यहां पहुंच गया है अब वह मुझे नहीं छोड़ेगा इसलिए मुझे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे वह मारा जा सके उसने मन में सोचा अब मैं यहां के राजा को एक सुरीला गाना और नृत्य प्रस्तुत करती हूं
जिससे वह खुश होकर मुझे कुछ मांगने के लिए बोलेंगे तब मैं राजा के आदेश से उसे मरवा दूंगी इसके बाद राजकुमारी प्रभावती ने एक सुरीला गाना और नृत्य प्रस्तुत किया राजकुमारी की इस बसंत की बहार को सुनकर राजा खुश हुआ वह प्रभावती से बोले मैं तुम पर बहुत खुश हूं तुम मुझसे क्या मांगना चाहती हो तब राजकुमारी ने कहा अगर आप मुझसे प्रसन्न है तो सब से पहले मुझे वचन दीजिए और फिर जो कुछ मैं मांगूंगी आप मुझे वही देंगे फिर प्रभावती ने कहा इस सभा में मेरा एक चोर है
कृपया उसे फांसी की सजा दें राजा ने कहा तुम उस चोर को मेरे सामने लाओ प्रभावती ने चंद्रभान का हाथ पकड़ा और उसे राजा के सामने ले गई राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि इस चोर को जल्लाद के पास ले जाओ और इसे फांसी पर चढ़ा दो इसी बीच
चंद्रभान का सेठ भी वहां पहुंचा वह डर कर चंद्रभान के पास गया और पूछा तुमने क्या चुराया इसका जिसके कारण वह तुझे मारना चाहती है चंद्रभान ने अपने मालिक से कहा मालिक मैंने कुछ नहीं चुराया है बस आप इस राजा को केवल यह बता दो कि वह मेरी दो बातें सुन ले इससे मेरी जान बच सकेगी अब

चंद्रभान का मालिक इसे सुनकर अपने साथी व्यापारियों और साहूकारों के पास गया और सभी ने मिलकर मशवरा किया और उन्होंने कहा मित्रों या तो राजा न्याय करें या हम सभी शहर को छोड़कर कहीं और चले जाएंगे और इस प्रकार सभी व्यापारी राजा के पास गए और कहने लगे राजा साहब हमारा मुनीब निर्दोष है
उसे मारव देने का आपको आदेश है वह कह रहा है कि वह अपनी दो बातें आपको कहना चाहता है फिर भी आपको लगे कि उसने अपराध किया है तो उसे फांसी दे देंगे लेकिन वह कहता है कि मेरे मरने से पहले राजा केवल मेरी दो बातों को जरूर सुने फिर राजा ने व्यापारियों की बात सुनकर कहा ठीक है मुनीब को बुलाओ चंद्रभान को लेकर राजा के सामने लाया गया और राजा ने कहा तुम जो कुछ कहना चाहते हो
वह मेरे सामने कहो तब राजकुमार चंद्रभान ने कहा महाराज मैंने क्या दोष किया है जिसके कारण आपने मेरी हत्या का आदेश दे दिया है फिर उसकी बात को सुनकर राजा ने कहा तू इस राजकुमारी का चोर है चंद्रभान ने कहा नहीं महाराज मैं इस कुलटा स्त्री का पति हूं जो मुझे कुएं में धकेल कर एक साधु के साथ चली आई है राजकुमारी प्रभावती ने समझ लिया कि बात बिगड़ रही है तब राजा से कहती है महाराज मैं कुलटा नहीं हूं या झूठ बोल रहा है यह कौन है मैं

इसे जानती तक नहीं यह तो मेरा चोर है मैं सिर्फ इतना ही जानती हूं फिर राजकुमार चंद्रभान ने कहा महाराज ठीक है अगर यह मेरी पत्नी नहीं है तो वह सब कुछ जो मैंने रास्ते में छोड़ा था वह मेरी अमानत के रूप में मुझे वापस कर दे राजकुमार ने अपनी अमानत को लौटाने की बात की तो राजकुमारी प्रभावती ने इसे स्वीकार कर लिया तब
चंद्रभान ने कहा अच्छा अब तुम अपने हाथों में पानी लो हमारा न्याय इसी सभा में होगा पानी लेकर उसने जमीन पर रखा और कहा वह वस्तु जो तुमने मुझे रास्ते में दी थी मैं अब वापस कर रहा हूं प्रभावती ने भी पानी लिया और कहा जो वस्तु तुमने मुझे रास्ते में दी थी मैं अब वापस कर रही हूं जैसे ही उसने अपने हाथों का पानी छोड़ा राजकुमारी के प्राण छूट गए यह दृश्य देखकर वहां के लोग हैरान रह गए तो राजा यह देख चिंतित होकर
चंद्रभान से कहा यह क्या हो गया बताओ मुझे सच्चाई तब राजकुमार चंद्रभान ने अपनी कहानी शुरू की अपने जीवन की सब घटनाओं को खोलकर बताते हुए उसके देश और घर निकाले जाने से लेकर अब तक की सभी घटनाओं को सुनाया राजा ने सब कुछ सुनकर चंद्रभान को अपने गले लगा लिया अपनी बेटी की शादी चंद्रभान के साथ करा दी तोते ने कहा प्रभु मैंने इस कहानी को सुना है मैं भी स्त्रियों से घृणा करता हूं और मैं यह कह सटता हूं कि
इस संसार में स्त्रियां पुरुषों से अधिक पापी और विश्वासघाती होती है इस कहानी ने सबको हैरानी में डाल दिया माता लक्ष्मी ने कहा है प्रभु मुझे लगता है कि तोता सच कह रहा है लेकिन सभी स्त्रियों में से केवल एक दो ही बिना नैतिक मूल्यों और ईमानदारी के हो सकती है परंतु पुरुषों में भी ऐसे कुछ है जो पापी और विश्वासघाती हो सकते हैं फिर भगवान श्री कृष्ण ने पूछा ठीक है तो मैना तुम कैसे सिद्ध करोगी यह बात सुनकर मैना ने कहा मैं भी

एक कहानी सुनाती हूं जिससे स्पष्ट होगा कि स्त्री की तुलना में पुरुष अधिक पापी और विश्वासघाती होते हैं एक गांव में एक परिवार रहता था जो बहुत ही धनवान था और उस धनवान यानी साहूकार का बेटा एक अद्भुत प्रकार का व्यक्ति था साहूकार का बेटा ऐसा जुवारी था कि साहूकार उसके बारे में सोचते सोचते परेशान रहते थे
एक दिन उसका बेटा जुआ खेल रहा रहा था उसी दिन उसके पिता का निधन हो गया फिर भी उसने जुआ खेलना बंद नहीं किया बल्कि पिता की मृत्यु के बाद वह खुलकर जुआ खेलने लगा और अब सब कुछ हार गया फिर वह अपने गांव से दूर चला गया और एक साहूकार के घर पहुंचा और साहूकार से बोला मुझे बहुत तेज प्यास लगी है
मुझे एक गिलास पानी मिलेगा तो सेठ ने उस युवा से पूछा कि तुम कौन हो क्या करते हो और कहां से आए हो इसके उत्तर में उस युवा ने कहा मैं एक व्यापारी हूं और यहां से जा रहा था तो सोचा कि पानी पीकर चला जाऊं तब साहूकार ने पूछा कि तुम कौन सा व्यापार करते हो तब युवा कहता है व्यापार करते समय मेरा सामान समुद्र में गिर गया इसलिए यदि आप मेरी कुछ मदद कर दें तो अच्छा होगा फिर
साहूकार ने लड़के की बात सुनी और फिर उसकी बातों के जाल में फंस गया और कहने लगा कि बेटा तुम तो ठीक हो और कुछ कमा भी लेते हो तो क्या मेरी बेटी से विवाह करोगे अब तो यह बात सुनकर युवा खुश हो जाता है और विवाह के लिए हां कह देता है जिसके बाद दोनों का विवाह हो जाता है मैंना बोली प्रभु इस प्रकार से वह साहूकार अपनी बेटी को बहुत सारे धन के साथ विदा कर देता है उधर युवा लड़के को तो बस केवल धन के लिए विवाह करना था तो

उसने विवाह भी कर लिया अब विवाह के बाद जब युवा साहूकार की लड़की को साथ लेकर जा रहा था तो एक जंगल आ गया वहां पर युवा लड़का अपनी पत्नी से बोला देखो हम अभी जंगल में हैं यहां कोई चोर हमारे गहनों को चुरा सकता है इसलिए आप अपने सभी गहनों को मुझे दे दें ताकि हम सुरक्षित रख सके युवा की पत्नी ने अपने पति पर भरोसा किया और अपने सभी गहनों को उसे सौंप दिया और वह भरोसा क्यों ना करें क्योंकि वह उनके पति थे
उसके बाद युवा ने अपनी पत्नी के गहनों को एक पारदर्शी थैली में बांध लिया और फिर वह जंगल में आराम से ठहरे और इस दौरान युवा के मन में लालच तो पहले से ही था फिर वह और ज्यादा बढ़ गया उसकी पत्नी के साथ जाने वाली एक दासी जिसे साहूकार ने अपनी लड़की के साथ भेजा था युवा ने उस दासी को मार डाला फिर उसने अपनी पत्नी को एक कुएं में गिरा दिया और मन में यह विचार किया कि मैंने इसके साथ सिर्फ धन के लिए शादी की थी
मुझे धन मिल गया और उसने सोचा कि वह पानी में डूबकर मर जाएगी इस तरह सोचकर वह युवा वहां से चला गया लेकिन उसकी पत्नी नहीं मरी और वह कुएं से बाहर निकलने के लिए आवाज देती रही कुएं के पास से एक आदमी गुजर रहा था और जब उसने किसी महिला की आवाज सुनी तो उसने उस महिला को कुएं से बाहर निकाल दिया फिर कुएं से बाहर निकलने के बाद महिला ने अपनी सारी जानकारी उस व्यक्ति को दी और उस
व्यक्ति ने महिला को उसके पिता के घर पहुंचा दिया अब जब महिला पिता के घर पहुंची तो उसके पिता ने पूछा तुम्हारे साथ क्या हुआ महिला ने कहा पिताजी जंगल में कुछ चोरों ने हम पर हमला किया था और दासी को मार दिया मुझे कुएं में धकेल दिया और पति के बारे में कुछ पता नहीं है बेटी की बातें सुनकर
साहूकार जी ने कहा कोई बात नहीं भगवान सब ठीक करेंगे और मैना बोली प्रभु इस दुनिया में पुरुष ही विश्वास घाती और पापी हो सकते हैं अब आपके हाथ में न्याय का फैसला है मैंने भी आपको एक कहानी सुनाई है और तोते ने भी एक कहानी सुनाई है अब आप ही न्याय करें उसने भी अपनी पत्नी को मारा और सारा सामान लेकर के चला गया अब तोता और मैना की कहानी सुनकर भगवान श्री कृष्ण बोले ठीक है तोता और मैना मैंने तुम्हारी कहानी को ध्यान से सुना है
अब मैं तुम्हारा न्याय करता हूं सच में इस संसार में स्त्री और पुरुष के बीच ज्यादा पापी या विश्वास घाती कौन होता है यह मेरे लिए स्पष्ट है और श्री कृष्ण जवाब देते हैं बिना किसी शंका के यह सत्य है कि इंसान की सोच उसके स्तर से नीचे जा सकती है और वही पापी और विश्वास घाती होता है चाहे स्त्री हो या पुरुष इंसान को किसी भी प्रकार के पाप करने से पहले यह सोचना चाहिए कि क्या वह सही है या नहीं पापी और वे विश्वासघाती होने की कोई जाति नहीं होती

वह इंसान की सोच और कृतियों का परिणाम होता है मित्रों वास्तव में इंसान की सोच उसके स्तर से नीचे जा सकती है और यही पापी और विश्वास घाती बना देता है धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत काल में योग राज कृष्ण ने अमृत्व प्राप्त करने वाले गुरु द्रोण के पुत्र अस्वस्था मा को भूर्ण हत्या के प्रयास दंड देते हुए उसकी अमूल्य धरोहर अभाव में शक्ति विहीन हो गया था उल्लेखनीय है कि अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे
शिशु को मारने का प्रयास अवस्थामा ने किया था तब उसकी रक्षा के लिए स्वयं भगवान कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर भूर्ण रक्षा किए थे और यही कारण है धर्म ग्रंथ में जीव अथवा भ्रूण हत्या के विरोधी है धर्म ग्रंथों के अनुसार नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है इसके लिए हर युग में महापुरुषों ने उसकी पूजा की है नारी ने अपने गर्भ से महापुरुषों के साथ-साथ ईश्वरीय शक्ति को भी जन्म दिया है यही कारण कि नारी को जगत जननी एवं सृष्टि निर्माता भी कहा गया है और
सृष्टि को समाप्त करने का अधिकार पृथ्वी लोक वासियों को किसी भी धर्म ग्रंथ ने नहीं दिया है यही कारण है कि भ्रूण हत्या पाप ही नहीं महापाप भी है इस पाप के लिए पाने को सौं जन्मों तक नरक के कष्टों को झेलना होता है देखा जाए तो महाभारत के युद्ध में एक से एक पाप हुए लेकिन क्या अश्वथामा का पाप इतना बड़ा था कि

भगवान श्री कृष्ण ने उनको श्राप दे दिया रामायण के मुकाबले जितना छल और पाप महाभारत में हुआ उसकी गिनती तक नहीं की जा सकती दोनों तरफ से छल हुए दोनों तरफ से मरने वालों की गिनती असंख्य रही लेकिन जितने भी लोगों की मृत्यु हुई रणभूमि में हुई दुर्योधन दुशासन जैसे पापी और अधर्मी भी या तो जंग में मरे या फिर
जंग में लगी छोटों के कारण यानी सभी को स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई हुई थी और मित्रों अब आपको पता चल गया होगा कि इस दुनिया में सबसे बड़ा पापी स्त्री है या पुरुष चाहे स्त्री हो या पुरुष हो कोई भी हो पर जो सबसे बड़ा पाप करता है वही पापी होता है तो मित्रों आशा करता हूं आज काआर्टिकल

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