श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,श्री कृष्ण ने सुनाई,पितृपक्ष में, महान कथा सुनने से गरीबी दूर होती है

नमस्कार दोस्तों आप सभी का हार्दिक स्वागत है। आज हम आपके लिए पितृ पक्ष की एक महान और दिव्य कथा लेकर आए हु। कहा जाता है कि इस पवित्र कथा को श्रवण करने मात्र से सभी प्रकार के पितृ दोष समाप्त हो जाते हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,जिस मनुष्य के कानों में यह कथा पड़ती है, उसके करोड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अपार धन संपत्ति, सुख तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह अद्भुत कथा स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने पक्षीराज गरुड़ को सुनाई थी।

आइए श्रद्धा और मनोयोग के साथ सुनते हैं। पितृ पक्ष की यह परम मंगलमय कथा। दोस्तों बात बहुत प्राचीन समय की है। एक बार पक्षियों के राजा गरुड़ के मन में पितृ पक्ष को लेकर गहरी जिज्ञासा उत्पन्न हुई।

इस जिज्ञासा का समाधान पाने के लिए गरुड़ जी द्वारिका पहुंचे और भगवान श्री कृष्ण के समक्ष विनम्रता पूर्वक प्रणाम कर खड़े हो गए। भगवान श्री कृष्ण ने गरुड़ को स्नेह पूर्वक अपने समीप बैठने का संकेत किया। गरुड़ ने हाथ जोड़कर निवेदन किया हे प्रभु मेरी एक शंका है। कृपा करके बताइए पितृ पक्ष में यदि मनुष्य पितरों की पूजा करता है तो उसे क्या फल मिलता है?

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,इन पवित्र दिनों में पितरों की प्रसन्नता के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाने चाहिए?

भगवान श्री कृष्ण ने गरुड़ की ओर मुस्कुरा कर देखा और बोले हे गरुड़ तुमने अत्यंत उत्तम प्रश्न किया है। वास्तव में तुम्हारे प्रश्न में संपूर्ण मानव जाति का कल्याण निहित है। जो व्यक्ति श्रद्धा से पितरों को संतुष्ट करता है। उसके सभी दुख दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

पितरों की पूजा करने से मनुष्य को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस संदर्भ में एक प्राचीन कथा प्रचलित है जो मैं आज तुम्हें सुनाता हूं।

इसे ध्यानपूक सुनो। जो भी श्रद्धा पूर्वक इस कथा को सुनता हूं और सुनाता है उसके समस्त पितृदोष नष्ट हो जाते हैं और उस पर सदैव पितरों की कृपा बनी रहती है। और गरुड़ ने उत्सुक होकर कहा हे प्रभु आपके श्री मुख से इस मंगल कथा को सुनने के लिए मैं अत्यंत आतुर हूं। कृपया मुझे विस्तार से यह कथा सुनाइए। मैं अवश्य इस पुनीत कथा को जनजन तक पहुंचाऊंगा।

श्री कृष्ण बोले हे गरुड़ बहुत समय पहले की बात है। प्राचीन काल में रुचि नाम के एक पराक्रमी राजा थे। राजा रुचि ने एक दिन संसार के समस्त माया मोह को त्यागने का निर्णय ले लिया। उन्होंने अपना राजपाट, धन दौलत और सारे सांसारिक सुखों का परित्याग कर दिया और वैराग्य धारण कर लिया।

निर्मोही होकर वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तपस्वी जीवन बिताने लगे। राजा रुचि घर परिवार छोड़कर वन में एक साधु की भांति
विचरण करने लगे। वे दिन में केवल एक बार अल्प भोजन करते और बाकी समय प्रभु चिंतन एवं तपस्या में लीन रहते थे।

राजा रुचि के इस कठोर त्यागपूर्ण जीवन को देखकर उनके पितृग अत्यंत चिंतित हो उठे। स्वर्ग लोक में विराजमान उनके दिवंगत पूर्वज यह देखकर बहुत दुखी हुए कि उनका वंशज संसार त्याग कर सन्यासी जीवन अपना रहा है।

अपने पुत्र के वंश को इस प्रकार समाप्त होता देख पितरों को भय होने लगा। वे विचार करने लगे कि यदि रुचि ने विवाह नहीं किया और संतान उत्पन्न नहीं की तो उनके कुल की परंपरा यहीं समाप्त हो जाएगी।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,फिर पितरों को पिंडदान और श्राद्ध कर्म कौन करेगा?

इस आशंका से व्याकुल होकर पितरों ने निश्चय किया कि उन्हें स्वयं पृथ्वी लोक पर जाकर अपने वंशज को समझाना चाहिए ताकि वह वैराग्य छोड़कर गृहस्थ जीवन अपना ले।

कुछ समय पश्चात एक दिन ऋषि बन चुके राजा रुचि वन में एकांत तपस्या में लीन थे। उसी सम अचानक एक दिव्य प्रकाश वहां प्रकट हुआ और चार तेजस्वी पुरुष वहां अवतरित हुए। उन दिव्य आत्माओं को देखकर ऋषि रुचि की तंद्रा भंग हो गई और उन्होंने विस्मय से आंखें खोली।

अपने समक्ष ऐसे अलौकिक आगंतुकों को खड़ा देखा तो वे तत्काल उठकर उनके चरणों में दंडवत प्रणाम करने लगे। उन्होंने विनीत स्वर में पूछा। हे महान आत्माओं आप कौन हैं? और आज मेरे समक्ष प्रकट होने का क्या कारण है?

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,उनमें से एक दिव्य पुरुष ने मधुर स्वर में कहा, वत्सुचि हम तुम्हारे पितृग हैं। अर्थात तुम्हारे पूर्वज तुम्हारा वर्तमान आचरण देखकर हम अत्यंत दुखी हैं। इसलिए तुमसे मिलने आए हैं। अपने पूर्वजों को सामने खड़ा जानकर ऋषि रुचि की आंखें श्रद्धा से भर आई।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,उन्होंने हाथ जोड़कर आदर पूर्वक कहा हे पूज्य पितर देवों आपके दर्शन से मेरा जीवन धन्य हो गया। कृपा करके यह बताइए कि मेरे किस व्यवहार से आप अप्रसन्न हैं। मुझसे ऐसी क्या त्रुटि हुई है जो आप सभी मुझे चेताने स्वर्ग से स्वयं पधारे हैं।

एक पितर ने गंभीर स्वर में कहा हे पुत्र हम तुम्हारे जीवन के मार्ग से संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि तुमने अब तक विवाह ही नहीं किया। बताओ तुमने गृहस्थ जीवन से मुंह मोड़ने का निर्णय क्यों लिया?

विवाह करना और गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करना मानव जीवन का परम कर्तव्य है। गृहस्थ आश्रम तो स्वर्ग एवं मोक्ष प्राप्ति का उत्तम मार्ग माना गया है। गृहस्थ बने बिना मनुष्य अपने समस्त कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकता ना ही मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

दूसरे पितर ने समझाते हुए आगे कहा, हे वत्स गृहस्थ जीवन में रहकर ही मनुष्य देवताओं, पितरों, ऋषि मुनियों और अतिथियों की सेवा भली-भांति कर पाता है। जो व्यक्ति घर परिवार में रहकर यज्ञ करता है।

देवताओं को स्वाहा उच्चार के साथ हवी अर्पित करता है

और पितरों के निमित्त स्वधा कहकर तर्पण करता है। वही अपने देव ऋण और पितृ ऋण से मुक्त होता है। इसी प्रकार गृहस्थ अपने द्वार पर आए अतिथि को अन्न जल देकर तृप्त करता है और दान पुण्य करता है तो ऋषि ऋण और मानव ऋण भी चुका देता है।

एक अन्य पिता ने समझाया संतान उत्पन्न करना और वंश को आगे बढ़ाना मनुष्य का परम धर्म है। सोचो बिना संतान के तुम स्वर्ग कैसे प्राप्त करोगे? तुम्हारे बाद तुम्हारे पितरों को पिंडदान और श्राद्ध कर्म कौन करेगा?

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,देव पूजा और पितृ तर्पण जैसे कर्म किए बिना तुम्हें उत्तम लोकों की प्राप्ति भी नहीं होगी। यदि तुम अपने कर्तव्य से विमुख रहे तो मरने के बाद तुम्हें नरक भोगना पड़ेगा और अगले जन्म में भी कष्ट उठाने पड़ेंगे।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,पितरों की बात सुनकर कुछ देर तक ऋषि रुचि मौन रहे। फिर उन्होंने धीरे से उत्तर दिया हे मेरे पूज्य पूर्वजों आपकी चिंताओं का मूल कारण मैं समझ रहा हूं। किंतु कृपा करके मेरी बात भी सुनिए।

मेरे विचार में सांसारिक विवाह का बंधन मनुष्य के लिए अनेक दुखों का कारण बन जाता है। गृहस्थ जीवन में कदम रखते ही मोह माया घेर लेती है और मनुष्य जाने-अजाने नए पाप कर्म करने लगता है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,इसी विचार से मैंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया है। मैं मानता हूं कि स्त्री संग करने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना कठिन हो जाता है। जिससे आत्मिक शांति भंग होती है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,जो व्यक्ति ब्रह्मचर्य का पालन करते

हुए प्रतिदिन शास्त्रों का अध्ययन करता है और ज्ञान रूपी अमृत से अपनी आत्मा को निर्मल
करता है वही वास्तव में प्रशंसनीय है। इसलिए मैंने अपनी इंद्रियों को वश में रखते हुए ज्ञान के मार्ग पर चलने का निर्णय किया है ताकि अपनी आत्मा को संसार के बंधनों से दूर रख सकूं। पितृग कुछ क्षण के लिए शांत रहे। फिर एक पितर ने धैर्य पूर्वक समझाया वत्स इंद्रिय संयम और आत्मा की शुद्धि की बात तुमने ठीक कही है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,मनुष्य को अवश्य अपने मन और इंद्रियों को वश में रखना चाहिए और आत्मज्ञान के जल से अपनी आत्मा को पवित्र करते रहना चाहिए। लेकिन तुम जिस मार्ग पर चल रहे हो वह पूर्ण कल्याण का पथ नहीं है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,वेद शास्त्रों में जिन कर्मों का विधान है उनका त्याग करना उचित नहीं। यज्ञ, दान, तप जैसे शुभ कर्म यदि निष्काम भाव से किए जाएं तो वे बंधन नहीं बनते बल्कि पापों को नष्ट करते हैं। पूर्व जन्मों के पाप पुण्य भी मनुष्य को जो सुख-दुख देते हैं उनका भोग कर लेने से कट जाते हैं।

अब तुम्हारे तर्क का उत्तर सुनो। शास्त्रों में पुरुष को विवाह करने और गृहस्थ आश्रम अपनाने का आदेश दिया गया है। यदि तुम विवाह नहीं करोगे तो तुम्हें मोक्ष कैसे मिलेगा? बिना संतान के ना तुम्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी ना हमें तर्पण मिलेगा।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,संतान के द्वारा किए गए श्राद्ध से ही पितरों को तृप्ति मिलती है और वंश आगे बढ़ता है। अतः हे पुत्र विधि पूर्वक विवाह करो और संतान उत्पन्न करो। यदि तुम ऐसा नहीं करते तो अब तक तुमने तप त्याग से जो भी पुण्य अर्जित किया है वह सब निष्फल हो जाएगा।

हमारा वंश नष्ट होने से हम पितर भी अतृप्त रह जाएंगे। केवल संतान प्राप्त करके और उसका उचित पालन पोषण करके ही तुम हमें संतुष्ट कर सकते हो। पितरों के इन तर्कपूर्ण वचनों ने ऋषि रुचि का हृदय परिवर्तित कर दिया। उन्होंने अनुभव किया कि वास्तव में उनके पूर्वज सही कह रहे थे।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,काफी विचार करने के बाद अंततः

उन्होंने तय किया कि अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए गृहस्थ जीवन अपनाना ही उचित है। इसके पश्चात ऋषि रुचि ने हाथ जोड़कर पितरों से निवेदन किया हे पितृ देवों आपने मुझे सन्मार्ग दिखाया है। अब मैं गृहस्थ जीवन अपनाने के लिए तैयार हूं और विवाह करने का संकल्प लेता हूं। परंतु एक समस्या है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,मेरी आयु अब काफी अधिक हो चुकी है। मेरे जैसे वृद्ध और तपस्वी व्यक्ति को कौन अपनी कन्या देगा? किस कन्या के माता-पिता मुझसे उसका विवाह करना स्वीकार करेंगे? यह सोचकर मेरे मन में संकोच हो रहा है। पितृग ने उत्तर दिया। वत्स तुम सिर्फ अपना कर्तव्य निभाने का प्रण करो।

मार्ग अपने आप निकल आएगा। यदि तुम हमारे वचनों कोनहीं मानोगे तो हम पितरों का पतन निश्चित है और तुम्हारी भी अधोगति होगी। यह मत सोचो कि कन्या कौन देगा। याद रखो ईश्वर उन लोगों की सहायता करते हैं जो अपने दायित्व का निर्वाह करने को तत्पर रहते हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,इतना कहकर चारों दिव्य पितर क्षण भर में अदृश्य हो गए। पितरों के अंतर्ध्य होते ही ऋषि रुचि अकेले वन में खड़े रह गए। अब उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपने लिए एक उपयुक्त जीवन संगिनी खोजने की थी।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,उन्होंने संकल्प तो कर लिया था परंतु मन में शंका और चिंता उठ रही थी कि यह कार्य कैसे पूर्ण होगा। ऋषि रुचि ने अनेक स्थलों पर भटक कर अपने लिए वधू खोजने का भरसक प्रयास किया। किंतु हर ओर निराशा ही हाथ लगी। उनकी वृद्धावस्था और तपस्वी जीवन को देखकर कोई भी उन्हें कन्या देने के लिए तैयार नहीं था।

समय बीतने के साथ उनकी निराशा बढ़ती गई। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पितरों के वचन उन्हें बार-बार स्मरण आते और उनका हृदय व्यथित हो उठता। फिर भी वे निरंतर प्रयत्नशील रहे। आखिरकार बहुत सोच विचार के बाद ऋषि रुचि इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अब केवल ईश्वर ही उनकी सहायता कर सकते हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,उन्होंने निश्चय किया कि सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा

की आराधना की जाए। यह सोचकर वे घने वन में एकांत स्थान पर तपस्या करने बैठ गए। ऋषि ऋषि ने दृढ़ संकल्प के साथ तप आरंभ किया। उनकी तपस्या दिनोंदिन कठोर होती गई। उन्होंने 100 वर्षों तक कठोर तप में खुद को तपाया। उनकी तपस्या की ज्वाला इतनी प्रबल थी कि देवलोक तक उसकी ऊर्जा से कंपित होने लगा।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,अंततः उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर जगत पिता ब्रह्मदेव प्रकट हुए। चार मुखों वाले ब्रह्मा जी अपनी पूरी दिव्य आभा के साथ प्रकट हुए और उनके आते ही सारा वन प्रकाश से आलोकित हो उठा। ब्रह्मा जी के दर्शन पाकर ऋषि रुचि गदगद हो उठे और उन्होंने झटपट उठकर आदर पूर्वक ब्रह्मदेव को प्रणाम किया। ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर कहा हे रुचि तुम्हारी तपस्या ने मुझे संतुष्ट किया है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,तुम्हारी लगन और धैर्य अनुकरणीय है। बताओ वत्स तुम्हारी क्या अभिलाषा है? जो इच्छा तुम्हारे हृदय में हो निसंकोच मुझसे कहो। मैं तुम्हारी मनोकामना पूर्ण करूंगा। भगवान ब्रह्मा के मधुर वचन सुनकर ऋषि रुचि की आंखों में श्रद्धा के आंसू आ गए।

उन्होंने हाथ जोड़कर विनीत स्वर में कहा, हे जगत पिता आपके दर्शन मात्र से मेरा जीवन सचलानेफल हो गया। मेरे पितरों ने मुझसे वंश चलाने के लिए संतान उत्पन्न करने को कहा है। किंतु मुझे योग्य वधू की प्राप्ति नहीं हो रही है। सारे प्रयास विफल रहे हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,कृपा करके आप ही कोई उपाय बताइए या स्वयं मुझे कोई सुपात्र कन्या प्रदान कीजिए जिससे विवाह कर मैं संतान उत्पन्न कर सकूं। ब्रह्मा जी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया हे ऋषिवर तुम्हारे पितरों ने तुम्हारे लिए जो मार्ग सुझाया है वह उचित है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,तुम निश्चिंत रहो। तुम्हें शीघ्र ही एक आदर्श पत्नी प्राप्त होगी। सुनो। आगे चलकर तुम स्वयं प्रजापति के पद को सुशोभित करोगे और तुम्हारे द्वारा अनेक प्रजाओं का पालन पोषण होगा। अब मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूं। तुम मन में अपनी इच्छा दृढ़ रखते हुए अपने पितृग की श्रद्धा पूर्वक पूजा करो।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,श्राद्ध और तर्पण के द्वारा अपने पितरों को प्रसन्न करो।

वे प्रसन्न होकर तुम्हारी यह कामना अवश्य पूर्ण करेंगे और तुम्हें उत्तम गुणों वाली पत्नी का वरदान देंगे। ऐसा कहकर भगवान ब्रह्मा अंतर्ध्य हो गए। ब्रह्मा जी के जाते ही ऋषि रुचि ने उनकी आज्ञा अनुसार तुरंत अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय प्रारंभ कर दिए।

ऋषि रुचि पास ही बहती एक पवित्र नदी के तट पर पहुंचे। वहां उन्होंने स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए। फिर एकांत में कुशा
बिछाकर आसन लगाया और अपने पितरों के निमित्त तर्पण किया।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,अंजलि में जल भरकर सूर्यदेव की ओर मुख करके मंत्रोच्चारण के साथ जल अर्पित किया और पितरों का आह्वान किया। इसके पश्चात एकाग्र चित्त होकर वे वहीं शांत चित्त से बैठ गए और पितृ देवों की महिमा का स्मरण करते हुए उनकी स्तुति करने लगे। श्री कृष्ण ने गरुड़ से कहा हे गरुड़ महात्मा रुचि ने उस समय पितरों की जो स्तुति गाई उसे प्रत्येक मनुष्य को ध्यान पूर्वक सुनना चाहिए।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,कहते हैं कि इस स्तुति के श्रवण मात्र से ही सभी प्रकार के दुखों और दोषों का नाश हो जाता है। जो इसे एक बार भी सुन लेता है उसके अनेक पाप कट जाते हैं और उसे पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए तुम भी मन लगाकर इस स्तुति को सुनो। तभी इस कथा का पूर्ण फल तुम्हें प्राप्त होगा।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,ऋषि रुचि हाथ जोड़कर आकाश की ओर देखते हुए भक्ति भाव से प्रार्थना करने लगे जो अधिदेवता रूप में सर्वत्र विद्यमान हैं और जिन्हें श्राद्ध के अवसर पर देवताओं के माध्यम से स्वधा उच्चारण द्वारा तृप्त किया जाता है उन समस्त पितृग को मेरा कोटि-कोटि नमन जो पितृग अग्निश्वात बरहशद आजप तथा सोमप कहलाते हैं वे सभी मेरे द्वारा किए गए इस श्राद्ध से संतुष्ट हो अग्न अग्निश्वत्थ पितृ मेरी पूर्व दिशा की रक्षा करें।

बश्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,रहशत पितर सदैव दक्षिण दिशा से मेरी रक्षा करें।

आजप पितृ पश्चिम दिशा की और सोमप पितर उत्तर दिशा की रक्षा करें। समस्त पितृग हम पर कृपा रखें और हमें राक्षस भूत प्रेत पिशाच जैसी दुष्ट शक्तियों के असर से बचाएं। विश्व विश्वभुख आराध्य धर्म धान्य शुभानन भूतिद भूतकृत और भूति नामक आदि नौ प्रकार के पितृगण कल्याण और कल्याद कल्याकर्ता कल्यातराश्रय कल्याता हेतु एवं अनघ नामक आदि छह प्रकार वर वरेण्य वरद तुष्टिद पुष्टिद विश्वपात एवं धाता आदि सात प्रकार पाप विनाशक जो महान महान महात्मा महित महिमावान और महाबल नाम से प्रसिद्ध पांच प्रकार उन गणों के ही साथ सुखद धनद धर्मद और भूतद नामक आदि चार प्रकार के पितृगण इस प्रकार कुल 31 प्रकार के पितृगण इस जगत में विराजमान हैं। मैं उन सभी पितरों को प्रणाम करता हूं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,कृपा करके आप सब मेरे द्वारा विधि पूर्वक अर्पित इस तर्पण और पिंडदान को स्वीकार कर तृप्त हो तथा मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें। महात्मा रुचि की इस भावपूर्ण स्तुति को सुनकर पितृग अत्यंत प्रसन्न हो गए। सहसा वहां एक चमत्कार हुआ। पितरों की कृपा से एक दिव्य प्रकाश प्रकट हुआ।

जिसने चारों ओर के आकाश को आलोकित कर दिया। उस उज्जवल तेज से संपूर्ण वातावरण जगमगा उठा।
ऋषि रुचि ने विस्मय और भक्ति भाव से उस प्रकाश की ओर देखा और तुरंत भूमि पर घुटनों के बल बैठकर हाथ जोड़ लिए। कुछ ही क्षणों में वह प्रकाश मूर्त रूप लेने लगा।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,ऋषि रुचि की स्तुति से प्रसन्न होकर पितृग प्रत्यक्ष दर्शन देने के लिए अवतरित हो रहे थे। जल्द ही वही चारों दिव्य पितर एक बार फिर रुचि के सामने प्रकट हुए। इस बार उनके मुख मंडल प्रसन्नता से दमक रहे थे। ऋषि रुचि ने श्रद्धा पूर्वक उनके चरणों में प्रणाम किया। वे पहले ही श्राद्ध में पुष्प, चंदन, धूप आदि अर्पित कर चुके थे और अब पितृग उन सुगंधित पुष्पों की मोहक महक से परिवेष्ठित दिखाई दे रहे थे।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,प्रसन्न पितरों ने हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहा,

हे पुत्र रुचि तुम्हारी भक्ति और स्तुति से हम अत्यंत संतुष्ट हैं। तुमने सच्चे हृदय से हमारा आवाहन कर तर्पण दिया और गुणगान किया है। अतः हम प्रसन्न होकर तुम्हें वरदान देना चाहते हैं। निर्भय होकर अपनी इच्छा हमारे समक्ष प्रकट करो। जो भी तुम्हारी अभिलाषा है निसंकोच हमसे मांग लो।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,ऋषि रुचि ने विनम्रता से सिर झुकाकर कहा हे पितृ देवों आपका असीम अनुग्रह है कि आप मुझसे प्रसन्न हैं। परमपिता ब्रह्मा जी ने भी मुझ पर कृपा कर सृष्टि के विस्तार हेतु मुझे प्रजापति बनने का आशीर्वाद दिया है।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,अब आप ही मुझ पर दया करके ऐसी पत्नी का वरदान दें जो गुणवान, तेजस्वी और सदाचारी हो। मैं चाहता हूं कि उससे मुझे उत्तम संतान की प्राप्ति हो जिससे हमारा वंश आगे बढ़े और आपके दिए हुए ऋणों से मैं मुक्त हो सकूं। पितरों ने आशीर्वाद भरी वाणी में कहा तथास्तु हे वत्स हम अभी इसी क्षण तुम्हारी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,हमारे आशीर्वाद से तुम्हें यहीं एक सुलक्षणा एवं मनोहर पत्नी प्राप्त होगी। उसी से तुम्हें एक तेजस्वी एवं बुद्धिमान पुत्र की प्राप्ति होगी। जान लो रुचि। पितरों ने मुस्कुराते हुए कहा, तुम्हारा वह पुत्र अद्वितीय, बुद्धिमान और महान पराक्रमी होगा। वह रोच्य नाम से तीनों लोकों में प्रसिद्धि प्राप्त करेगा।

आगे चलकर तुम्हारे उस पुत्र के भी अनेक बलवान और धर्म परायण पुत्र होंगे जो पृथ्वी पर राज्य करेंगे और प्रजा का कल्याण करेंगे। हमारा आशीर्वाद तुम्हारे वंश पर सदैव बना रहेगा। पितरों का वरदान मिलते ही निकट प्रवाहित नदी का जल तेज प्रकाश से जगमगा उठा। उसी प्रकाश के मध्य से एक दिव्य स्त्री प्रकट हुई जिनका रूप अद्भुत तेजस्वी था।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,यह स्वर्गलोक की अप्सरा प्रमलोचा थी

और उनके साथ एक अत्यंत सुंदर कन्या उपस्थित थी। प्रमलोचा ने महर्षि रुचि से कहा हे तपस्वी श्रेष्ठ मैं अप्सरा प्रमलोचा हूं। समुद्रदेव वरुण के पुत्र महर्षि पुष्कर के संग से मुझे यह अनुपम सुंदर कन्या प्राप्त हुई है। मेरी इस पुत्री का नाम मानिनी है और यह रूप एवं गुण में अद्वितीय है।

आज मैं अपनी इस प्रिय पुत्री को आपकी पत्नी के रूप में समर्पित करती हूं। कृपया आप मानिनी को स्वीकार करें। इससे आपको एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी जो मनु नाम से विख्यात होगा। अप्सरा प्रमलोचा के वचन सुनकर ऋषि रुचि का हृदय कृतज्ञता से भर गया। उन्होंने पितृगण और प्रमलोचा को प्रणाम करते हुए मानिनी को सहर्ष पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।

पितृग के आशीर्वाद से वही ऋषि रुचि और मानिनी का विधि पूर्वक विवाह संपन्न हो गया।

देवताओं ने प्रसन्न होकर पुष्प वर्षा की और वरवधू को आशीष दिया। प्रमलोचा ने अपनी पुत्री को गले लगाकर विदा किया और पितृग भी वरवधू को आशीर्वाद देकर अपने लोक लौट गए।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,कुछ समय पश्चात मानिनी ने एक परम तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम मनु रोच्य रखा गया। उस बालक ने युवा होकर अपनी बुद्धिमत्ता और पराक्रम से तीनों लोकों में अपने कुल की कीर्ति फैलाई और अपने कुल का गौरव बढ़ाया। इस प्रकार राजा रुचि का वंश आगे बढ़ा और उनके पितर पूर्णतः तृप्त व संतुष्ट हुए।

दोस्तों इस कथा से स्पष्ट होता है कि पितरों की पूजा और श्राद्ध कर्म का जीवन में अत्यंत महत्व है। पितृ पक्ष के दौरान cहमें अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धा पूर्वक स्मरण कर तपण करना चाहिए जिससे पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष 2025,यही है पितृ पक्ष की वह दिव्य कथा जो भगवान श्री कृष्ण ने पक्षीराज गरुड़ को सुनाई थी। इस कथा के श्रवण से समस्त पितृदोष शांत हो जाते हैं और परिवार में सुख समृद्धि आती है। आशा है कि आपको यह कथा सुनकर आनंद और प्रेरणा मिली होगी।

आपको यह कथा कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताएं। जानकारी अच्छी लगी तो आर्टिकल को लाइक करना ना भूलें और कमेंट में जय पितृदेव जय श्री कृष्ण पितृदेव संरक्षणम अवश्य लिखें। साथ ही पेज को फॉलो करें। आप सभी का धन्यवाद।

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