किस पाप के कारण स्त्री का गर्भ गिर जाता है | कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र नहीं होता है कौन सी स्त्री विधवा होती है ;भगवान विष्णु की कथा

नमस्कार मित्रों किस पाप के कारण स्त्रियों का गर्भ गिर जाता है दोस्तों आप सभी ने देखा होगा कि कुछ स्त्रियां गर्भवती तो होती हैं किंतु उनका बच्चा समय से पहले ही पैदा हो जाता है जिससे उस बच्चे की मौत भी हो जाती है और कई स्त्रियों को तो मरा हुआ बच्चा भी पैदा होता है दोस्तों आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे कि किस पाप के कारण स्त्रियों का गर्भ गिर जाता है और वह कौन से कार्य हैं जो एक गर्भवती स्त्री को कभी भी नहीं करनी चाहिए नहीं तो उसका गर्भ गिर जाता है

भगवान भोलेनाथ ने इसके बारे में क्या बताया है जानेंगे एक महत्त्वपूर्ण कथा के माध्यम से दोस्तो एक समय की बात है जब माता पार्वती भगवान भोलेनाथ से मिलने जाती हैं तो माता पार्वती को देखकर भगवान भोलेनाथ ने कहा हे देवी क्या बात है आज आप अचानक मुझसे मिलने क्यों आई हैं तब माता पार्वती ने कहा भु आज जब मैं पृथ्वी लोक पर भ्रमण कर रही थी तो मैंने देखा कि कुछ स्त्रियां गर्भवती तो होती हैं किंतु समय से पहले ही उनका गर्भ गिर जाता है

प्रभु इसे देखकर मेरे मन में दो प्रश्न उठ रहे हैं और आज मैं आपसे उन्हीं दोनों प्रश्नों का उत्तर पूछने के लिए आई हूं तो भगवान भोलेनाथ ने कहा हे देवी तुम्हारे मन में जो भी प्रश्न है मुझे निश्चिंत होकर बताओ मैं तुम्हारे दोनों प्रश्नों के उत्तर अवश्य ही दूंगा तो माता पार्वती ने कहा है प्रभु मेरा पहला प्रश्न यह है कि किस पाप के कारण स्त्रियों का गर्भ गिर जाता है और उस स्त्री के बच्चे की मृत्यु भी हो जाती है और मेरा दूसरा प्रश्न है कि वह कौन सी स्त्री के भाग्य में पुत्र की प्राप्ति नहीं होती है

और वह पूरा जीवन निसंतान रहती है और भगवान भोलेनाथ मुस्कुराते हुए बोले हे देवी आज आपने इन प्रश्नों का उत्तर पूछकर संपूर्ण मानव जाति का कल्याण कर दि हो किंतु इस प्रश्नों का उत्तर मैं आपको एक कथा के माध्यम से दूंगा और इस कथा को सभी स्त्रियों तथा सभी पुरुषों को अवश्य ही सुनना चाहिए क्योंकि इस कथा को सुनकर आपको पता चल जाएगा कि किस श्राप के कारण स्त्रियों का गर्भ गिर जाता है तथा वह कौन सी स्त्री है जिसके भाग्य में पुत्र की प्राप्ति नहीं होती है

पुत्र की प्राप्ति के लिए उसे क्या क्या करना चाहिए तो माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से कहा आप कथा सुनाइए प्रभु मैं कथा को पूरी मन लगाकर अंत तक सुनूंगी तो कथा को सुनाते हुए भगवान भोलेनाथ ने कहा एक समय की बात है जब एक नगर में एक बहुत अधिक धनवान सेठ रहता था वह इतना अधिक धनवान था कि उसके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी उस सेठ की एक पुत्री थी जिसका नाम कलावती था

कलावती विवाह करने के योग्य हो गई थी फिर उस सेठ ने सही मुहूर्त देखकर अपनी पुत्री कलावती का विवाह उसी नगर के समीप एक दूसरे गांव में में माधव सेठ के पुत्र के साथ कर दिया फिर वह विवाह के बाद सेठ की पुत्री कलावती अपने पति के घर में रहने लगी और वह अपने पति के घर में हंसी खुशी से रहने लगती है और अपने पति से बहुत ही अधिक प्रेम करने लगती है और कलावती की सांस का नाम प्रभावती था प्रभावती बहुत ही दुष्ट स्वभाव की थी कलावती अपने घर से दहेज में बहुत सारा धन सोना चांदी लाई थी

इसीलिए प्रभावती अपनी बहू कलावती से झूठ मूठ का सम्मान करती थी और हमेशा उससे मीठी-मीठी बातें भी करती रहती थी और कलावती से अपने मायके से कुछ ना कुछ लाने को कहा भी करती थी और कलावती अपनी सांस की बात मानकर अपने पिता से कहकर वह सोना चांदी घोड़े गाय बैल अनाज आदि चीजें भी मंगवाया करती थी और उसके पिता भी मना नहीं करते थे और सभी सामान देभी देते थे जिसके कारण कलावती की सांस उससे बहुत खुश रहती थी फिर इस तरह कलावती की सांस का लालच दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था

वह कलावती के मायके का सब कुछ हड़पना चाहती थी क्योंकि उस सेठ का कोई पुत्र भी नहीं था इसीलिए सारा कुछ कलावती का ही था फिर इस तरह काफी दिन तक चलता रहा और उसकी सांस उसे अपनी बातों में बहला फुसलाकर उसके मायके से सभी समान मांगंव लिया करती थी लेकिन भोलीभाली कलावती इस बात से भी अनजान थी कि उसकी सांस उसके पिता का सारा कुछ हड़पना हि चाहती थी और कलावती का पति रमेश भी अपने मां की ही बात मानता था

इसीलिए उसके घर में कलावती की सास जो कहती थी वही होता था और उसके घर में सारा काम उसकी मां के कहने से ही होता था और कलावती और का पति रमेश दोनों ही प्रभावती का कहना मानते थे इसीलिए उनके घर में कभी भी क्लश नहीं होता था और सब खुशी पूर्वक रहते थे इस तरह कुछ साल बीतने के बाद कलावती गर्भवती हो जाती है और अब उसकी सास को इस बात का पता चला तो वह बहुत खुश हो गई उसने तुरंत ही

कलावती के माता-पिता को इस बात की सूचना दी और साथ में बड़ी-बड़ी वस्तुओं की मांग की जब कलावती के पिता ने इस बात को सुना तो वह भी बहुत अधिक प्रसन्न हुए और फिर अगले ही दिन वह मिठाई तथा सोने कंगन और सोने की माला लेकर कलावती के ससुराल पहुंच गए और कलावती अपने पिता को देखकर बहुत खुश हुई फिर कुछ समय कलावती के ससुराल में रुककर उसके पिता अपने घर लौट आए फिर काफी दिनों तक कलावती का गर्भ बढ़ता गया

कलावती की सांस उसका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखने लगी थी तथा उसे समय-समय पर फल फूल खिलाती रहती थी और घर का सारा काम खुद करती थी कलावती को कोई भी काम नहीं करने देती थी इसीलिए कलावती पूरा दिन घर पर आराम करती थी फिर इस तरह कुछ दिन और बीत गए और एक दिन अचानक ही कलावती का गर्भ गिर गया जिससे कलावती की सांस बहुत ही क्रोधित हो जाती है और फिर कलावती को ताना मारते हुए कहने लगी

पापिन स्त्री तूने अपने जीवन में ऐसा कौन सा पाप किया है जिसके कारण जन्म लेने से पहले ही तुम्हारा बच्चा मर गया पता नहीं क्यों मेरे पुत्र ने तुझ जैसी पापीन स्त्री से विवाह कर लिया था और मेरे बेटे का तो जीवन ही नष्ट हो गया है अपनी सांस की यह बात सुनकर कलावती बहुत ही दुखी होकर कहने लगी सासू मां इसमें मेरा क्या दोष है मैंने अपने जीवन में कोई भी पाप नहीं किया है फिर भी पता नहीं क्यों मेरे साथ ऐसा हो क्यों हो रहा है तब उसकी सांस कहने लगी अरे दुष्ट स्त्री तूने जरूर ही

अपने जीवन में कोई घोर पाप किया है इसी कारण तेरा गर्भ गिर गया है दोस्तों फिर कथा को आगे बताते हुए भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती से कहते हैं हे देवी अब कथा को बहुत ध्यान से सुनना क्योंकि यहीं से आपको पता चलेगा कि किस पाप के कारण स्त्री का गर्भ गिर जाता है दोस्तों माता पार्वती ने कहा ठीक है स्वामी फिर उसीके बाद से कलावती की सांस उसे हमेशा ताने मारने लगी है और घर का सारा काम भी उसी से कराती थी

खुद कोई भी काम नहीं करती थी कलावती की सांस उससे इतना काम कराती थी कि कलावती को अब सहा नहीं जा रहा था और उसे खाना खाने का भी टाइम नहीं मिलता था और जब सब लोग भोजन कर लेते थे तो उसके बाद ही वह भोजन करती थी वो अपनी सांस के सामने आने से भी डरने लगी फिर इसी तरह कुछ महीने और बीत जाने के बाद कलावती दोबारा से गर्भवती हो गई जिससे उसका पति बहुत प्रसन्न हुआ लेकिन उसकी सांस अभी भी उससे गुस्सा करती थी

कलावती ने अपनी सांस को यह बात बताई तो वो कलावती से कहने लगी एक बच्चे को तो खा गई हो पता नहीं अब इस बच्चे को तो जीवित रख पाओगी या नहीं इसे भी उसी की तरह खा जाओगी मुझे तुझ पर जरा सा भी भरोसा नहीं है क्योंकि मुझे तो लगता है कि तूने अपने जीवन में जरूर कोई पाप किया है इसीलिए तेरा पहला गर्भ गिर गया था अपनी सांस की यह बात सुनकर कलावती कुछ नहीं बोली और चुपचाप खड़ी रही फिर धीरे-धीरे कलावती का गर्भ बढ़ता गया

गर्भवती होते हुए भी वह घर का सारा काम करती थी लेकिन फिर भी उसकी सांस को उस पर जरा सी भी दया नहीं आती थी फिर इस तरह करते-करते अब कलावती के गर्भ को नो महीने पूरे हो गए अब बच्चे के जन्म होने का समय बिल्कुल नजदीक आ गया था फिर कलावती ने फिर एक बालक को जन्म दिया किंतु वह बच्चा कुछ बोल नहीं रहा था और ना ही रो रहा था

कलावती ने देखा तो उसका बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ था और अपने मरे हुए बच्चे को देखकर वह बहुत जोर-जोर से रोने लगी फिर जब कलावती की सांस को इस बात का पता चला तो वह बहुत गुस्सा हो हुई और कलावती से कहने लगी तू एक पापीन स्त्री हो तभी तेरा यह दूसरा भी बच्चा मरा पैदा हुआ है मुझे तो पहले से ही सक था कि तूने अपने जीवन में जरूर कोई न कोई घोर पाप किया है

इसीलिए तेरे साथ ऐसा हो रहा है और इसीलिए तेरा यह पुत्र भी मर गया है अगर तू मेरे घर में ज्यादा और दिनों तक रहेगी तो तू मेरे भी घर को नाश कर देगी इसीलिए तुम अब इस घर में रहने की कोई जरूरत नहीं है तो कलावती कहने लगी सासू मां अब मैं कहां जाऊंगी मेरे लिए तो मेरे पति ही सब कुछ है मैं उन्हें छोड़कर कहीं नहीं जा सकती हूं मैं अपने पति से बहुत

आप मुझे इस घर से मत निकालिए मैं घर का सारा काम करूंगी और इसी घर के किसी कोने में पड़ी रहूंगी आप जो भी काम कहेंगी मैं वह सब कुछ करूंगी बस आप मुझे घर से मत निकालिए क्योंकि मैं अपने पति के बिना एक पल भी नहीं रह सकती हूं तो उसकी सांस बोली अरे पापीन स्त्री अगर तू अपने पति के बिना नहीं रह सकती तो कहीं पर जाकर मर जा लेकिन अब तुझे मैं इस घर में एक क्षण भी नही रहने दूंगी इतना कहकर कलावती की सांस कलावती को धक्के मारकर के घर से बाहर कर देती है

कलावती घर के बाहर बैठी रहती है लेकिन उसकी सांस ने घर का दरवाजा नहीं खोला दोस्तों फिर वह घर के बाहर बैठकर अपने मन में सोचने लगी अब मुझे यहां से अपने मायके ही जाना पड़ेगा फिर इतना सोचकर वह अपने माय के चल देती है तभी रास्ते में एक घना जंगल पड़ता है तो वह जंगल में रास्ते से अपने मायके के तरफ जा ही रही थी तभी बारिश होने लगती है तो वह एक पेड़ के नीचे बैठ जाती है तभी वहां से एक साधु महाराज जा रहे थे

पेड़ के नीचे बैठा देखकर उसे पूछा हे पुत्री तुम कौन हो और यहां इस जंगल में अकेली क्या कर रही हो तो कलावती ने साधु महाराज से कहा हे साधु महाराज मैं एक बहुत धनवान सेठ की पुत्री हूं और मेरा विवाह एक रूपवान सेट्से हुआ है और मुझे अभी तक पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई है मैं एक बार गर्भवती हुई थी तो मेरा गर्भ गिर गया था और जब मैं दोबारा गर्भवती हुई तो मेरा बच्चा पैदा होते ही मर गया था

इसीलिए मेरी सांस ने मुझे घर से निकाल दिया है इसीलिए मैं अब इस जंगल में इधर-उधर भटक रही हूं हे मुनिवर कृपया करके आप ही कुछ उपाय बताइए और जिससे मुझे पुत्र की प्राप्ति हो जाए तो साधु महाराज जी ने कहा तुम चिंता मत करो पुत्री हम तुम्हें पुत्र प्राप्ति का उपाय जरूर बताएं गें और जिसे यदि तुमने पूरी निष्ठा से किया तो तुम्हें पुत्र की प्राप्ति अवश्य ही होगी इसके लिए मैं तुम्हें कुछ नियम बताता हूं

इसे ध्यान से सुनो किसी भी स्त्री को मासिक धर्म के दौरान पति के साथ संबंध नहीं बनाना चाहिए किंतु पति का स्पर्श भी नहीं करना चाहिए इससे संतान गर्भ में ही गिर जाती है गर्भ धारण की हुई स्त्री को भगवान की पूजा अर्चना करते रहना चाहिए किंतु उसके मुख पर सदैव ही प्रसन्नता होनी चाहिए साथ ही गर्भवती स्त्री को कभी भी

दुखी और निराश नहीं रहना चाहिए क्योंकि दुखी रहने पर संतान पर बुरा प्रभाव पड़ता है और गर्भवती स्त्री को कभी दूसरों के घर का भोजन नहीं करना चाहिए तथा जितना हो सके अपने ही घर में रहना चाहिए एक गर्भवती स्त्री को कभी भी डरावनी चीजें नहीं देखनी चाहिए क्योंकि इससे संतान पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है और गर्भवती स्त्री को अच्छा भोजन करना चाहिए

जिससे संतान तम गुणवान होता है जो भी स्त्री इन नियमों का पालन करती है और वह उत्तम पुत्र को प्राप्त करती है और जो स्त्रियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं उनका गर्भ गिर जाता है फिर साधु महाराज जी ने कहा हे पुत्री अब मैं तुम्हें पुत्र प्राप्ति का उपाय बताता हूं इसे ध्यान से सुनना तो तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी तो

कलावती ने कहा जी महाराज तो साधु महाराज ने कहा किसी भी स्त्री को पुत्र प्राप्ति के लिए मासिक धर्म के प्रथम चार दिवस में पति-पत्नी को मिलन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दुराचार पुत्र होता है और पांचवी रात्रि में मिलन करने से पुत्री की प्राप्ति होती है तथा छठी रात्रि में मिलन करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है सातवीं रात्रि में मिलन करने से वंध्या पुत्री होती है

तथा आठवीं रात्रि में मिलन करने से बलशाली पुत्र की प्राप्ति होती है और नौवीं रात्रि में मिलन करने से सुंदर कन्या की प्राप्ति होती है तथा दसवीं रात्रि में मिलन करने से विद्वान और अति श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति होती है और ईगरवीं रात्रि में मिलन करने से सुंदर आचरण वाली कन्या प्राप्त होती है और बारवीं रात्रि में मिलन करने से गुणवान पुत्र होता है

तेरवीं रात्रि में मिलन करने से लक्ष्मी स्वरूपा पुत्री होती है और चोदवीं रात्रि में मिलन करने से गुणवान बुद्धिमान तथा बलवान पुत्र होता है इसीलिए यदि तुम इन नियमों का पालन करो तो तुम्हें उत्तम पुत्र की प्राप्ति होगी तना कहकर वह साधु महाराज वहां से चले जाते हैं फिर कलावती अपने मन में सोचने लगती है यदि मैंने साधु महाराज के बताए गए उपाय के अनुसार कार्य किया तो मुझे भी

एक पुत्र की प्राप्ति हो जाएगी और मेरी सांस मुझसे घर का काम भी नहीं कराएंगे और घर में सभी लोग मेरा बहुत अधिक सम्मान भी करेंगे कलावती इतना सोच ही रही थी तभी उसका पति उसे ढूंढते हुए वहां पहुंच जाता है और कलावती से कहता है तुम यहां इस जंगल में क्यों आई हो मैं तुम्हें लेने आया हूं

चलो घर चलो फिर कलावती ने अपने पति को उस साधु महाराज वाली सारी बात बताई और कहा नहीं अब मैं घर नहीं जाऊंगी जब तक मुझे पुत्र की प्राप्ति नहीं हो जाती है तब तक इसी जंगल में रहूंगी और कलावती की यह बात सुनकर उसका पति भी उसी के साथ जंगल में ही कुटिया बनाकर रहने लगता है और मासिक धर्म की चोदवीं रात्रि में कलावती ने अपने पति के साथ मिलन किया और जिससे वह गर्भवती हो गई और गर्भवती होते हुए भी वह गल में रहती थी उसका पति जंगल से लकड़ी लाता था

जिससे दोनों भोजन बनाकर खाते थे फिर इस तरह करते-करते नौ महीने बीत गए और कलावती को बच्चा पैदा होने का समय नजदीक आ गया था फिर एक दिन रूपवती को अत्यंत उत्तम पुत्र की प्राप्ति हुई और पुत्र की प्राप्ति से कलावती और उसका पति दोनों बहुत खुश हुए फिर कलावती का पति उससे कहने लग चलो अब हम दोनों घर चलते हैं क्योंकि मां ने तुम्हें पुत्र प्राप्ति का ताना देकर ही घर से निकाला था किंतु अब तो तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हो गई है

अब तो वह भी खुश हो जाएंगी तो कलावती ने कहा ठीक है चलो घर चलते हैं फिर दोनों घर जाते हैं तो उसकी सांस ने देखा कि कलावती को तो पुत्र हुआ है यह देखकर वह बहुत खुश हो गई और कलावती से कहने लगी तुझे पुत्र कैसे हुआ जब आपने मुझे घर से निकाला था तो मैं जंगल में चली गई थी और वहां मुझे एक ज्ञानी साधु महाराज मिले थे उन्होंने मुझे पुत्र प्राप्ति का उपाय बताया था और उसी पाय से मुझे पुत्र की प्राप्ति हुई है तो उसकी सास उससे कहने लगी इसका मतलब वह साधु महाराज बहुत अधिक ज्ञानी है

तब तो उन्हें यह भी पता होगा कि हम लोग धनवान कैसे बन सकते हैं इसीलिए अब मैं जंगल जाऊंगी और उनसे धनवान बनने का उपाय पूछकर आऊंगी तो कलावती ने कहा नहीं मां जी आप वहां मत जाइए क्या पता वह साधु महाराज अब वहां पर मिले या ना मिले तो उसकी सांस ने कहा नहीं मैं तो जाऊंगी और उनसे धनवान बनने का उपाय पूछ कर जरूर आऊंगी इतना कहकर उसकी सांस उसी जंगल में पहुंच जाती है तभी उसे एक शेर दिखाई देता है

तो वह शेर को देखकर डर जाती है तभी शेर उसे खाने के लिए आगे बढ़ता है जैसे ही शेर उसे खाने के लिए आगे बढ़ा तो कलावती की सांस ने उससे कहा हे सिंहराज तुम मुझे क्यों खाना चाहते हो तुम्हें मुझे खाकर क्या मिलेगा तो शेर बोला हे पापीन स्त्री तू बहुत दुष्ट स्वभाव की है इसीलिए मैं तुझे खा जाऊंगा इतना कहकर शेर उसे खा जाता है

फिर उसकी मौत हो जाती है और यम के दो दूत आते हैं और उसे यमलोक ले जाकर यमराज जी के सामने खड़ा कर देते हैं तभी चित्रगुप्त ने उस स्त्री के जीवन का लेखा जोखा देखा और उसके जीवन का लेखा झोखा देखकर कहने लगे हे धर्मराज इस स्त्री ने तो अपने जीवन में बहुत घोर पाप किए हैं यह स्त्री अपनी बहु रानी पर बहुत अत्याचा करती थी उसके गर्भवती होते हुए भी यह घर का सारा काम उसी से कराती थी और तो और जब इसकी बहू के पुत्र की मृत्यु हो गई थी तो

इसने उसे धक्के मारकर अपने घर से निकाल दिया था चित्रगुप्त की यह बातें सुनकर यमराज को उस स्त्री पर बहुत क्रोध आया और उन्होंने दूतों से कहा इसे नरक लोक में डाल दो दोस्तों फिर कथा को आगे बताते हुए भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती से कहते हैं हे देवी इस प्रकार उसकी सांस को उसके किए की सजा मिल गई और कलावती ने गर्भ धारण के नियमों का पालन किया जिससे उसे उत्तम संतान की प्राप्ति हुई

इसी तरह कोई भी स्त्री यदि उस साधु द्वारा बताई गई बातों के अनुसार कार्य करेगी तो उसे भी पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी तो माता पार्वती ने कहा प्रभु वह कौन सी स्त्रियां हैं जिनके भाग्य में पुत्र की प्राप्ति नहीं होती है और वह अपने जीवन में ऐसा कौन सा पाप करती हैं जिसके कारण उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं होती है और पुत्र प्राप्ति के लिए उन स्त्रियों को क्या करना चाहिए

तो भगवान भोलेनाथ ने कहा यह वह स्त्रियां हैं जो अपने पति से हमेशा लड़ाई झगड़ा करती रहती हैं और घर में सारा काम अपनी ही मनमानी से करती हैं तथा अपने पति का आदर सम्मान नहीं करती हैं तो ऐसी स्त्रियों के भाग्य में कभी भी पुत्र की प्राप्ति नहीं होती है और ऐसी स्त्रियों को पुत्र प्राप्ति के लिए अपने पति का आदर सम्मान करना चाहिए तथा उनका कहना मानना चाहिए और घर में लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहिए तो ऐसी स्त्रियों को भी पुत्र की प्राप्ति होगी दोस्तों आपको यह कथा कैसी लगी हमें कमेंट्स करके
जरूर बताएं तो प्रेम से बोलो जय माता लक्ष्मी धन्यवाद

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