नमस्का दोस्तों अगर आपके घर पर भी आपकी माताएं बहने सुबह उठकर जल्दी खाना नहीं बनाती हैं तो यह आर्टिकल उन सभी लोगों को देखना अति आवश्यक है क्योंकि इस आर्टिकल के माध्यम से आपको पता चलेगा कि वह कौन सा घर है जिस घर में माता लक्ष्मी ठहरती है और वह घर कभी भी गरीबी के चपेट में नहीं आता है

जैसा कि माताओं बहनों स्त्री घर की लक्ष्मी मानी जाती है शास्त्रों के अनुसार स्त्री को धन का दूसरा रूप भी माना जाता है क्योंकि जिस घर की महिला सदैव प्रसन्न रहती है उस घर में मां लक्ष्मी का वास भी होता है दोस्तों चलो मैं आप सभी को एक छोटी सी कहानी के माध्यम से इसके पीछे का गाॉड रहस्य बताता हूं स्वयं माता लक्ष्मी ने इस कहानी के माध्यम से बताया है
जिसे जानना आपके लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जिसके घर की महिला सुबह जल्दी उठकर खाना बनाती है और यह पांच महत्वपूर्ण काम है जो रोज करती है तो उस घर में क्यों स्वयं माता लक्ष्मी जी वास करती है
माता लक्ष्मी जी कहती हैं – रोज सुबह खाना बनाने वाली औरतें ये आर्टिकल जरूर पढ़ें नहीं तो आएगी भयंकर गरीबी.देवर्षि नारद जी दोस्तों एक समय की बात है देवर्षि नारद जी आकाश मार्ग से होते हुए जा रहे थे तब उन्होंने देखा कि एक मनुष्य जो की बहुत ही गरीब है वह जमीन पर बैठकर रो रहा था और अपनी फसल को देखे जा रहा है उस मनुष्य को देखकर देवर्षि नारद जी बहुत प्रभावित हुए और अपने मन में सोचने लगे कि यह व्यक्ति तो बड़ा ही दुखी लग रहा है

और मुझे इसके लिए कुछ करना होगा वह मनुष्य अभी रो ही रहा था कि देवर्षि नारद जी उसके सामने जाकर प्रकट हुए और उस मनुष्य से बोले हे पुत्र तुम क्यों रो रहे हो तुम्हारी इस करुणा के पीछे क्या कारण है अब उस मनुष्य ने अपनी आंखें खोली तो पाया कि सामने स्वयं नारायण के सबसे बड़े भक्त देवर्षि नारद जी खड़े हैं
उस मनुष्य ने देवर्षि नारद जी को नमन किया और उसने अपनी व्यथा बताई उस मनुष्य की व्यथा को सुनकर देवर्षि नारद जी सैच में पड़ गए कि मुझे इस मनुष्य की समस्या का समाधान तो करना ही है तो क्यों ना मैं इसकी समस्या के समाधान के लिए स्वयं माता लक्ष्मी से जाकर मिल लूं और उनसे ही पूछ लूंगा की मां ने इस मनुष्य का घर क्यों छोड़ा जिस वजह से यह गरीब हो गया है

अब देवर्षि नारद जी उस मनुष्य को आश्वासन दिलाते हुए कहते हैं कि मैं कुछ समय बाद तुम्हारे पास तुम्हारी समस्या का समाधान लेकर अवश्य उपस्थित हो जाऊंगा इतना कहकर देवर्षि नारद जी वहां से अंतर्ध्यान हो गए और माता लक्ष्मी जी के पास जाकर प्रकट हुए देवर्षि नारद जी को आया हुआ देखकर माता लक्ष्मी ने उन्हें प्रणाम किया और उनके आने का कारण पूछते हुए बोली यहां किसी प्रयोजन से पधारे हैं
तब देवर्षि नारद जी ने माता को प्रणाम करते हुए कहा कि आज जब मैं आकाश मार्ग में विचरण कर रहा था मैंने देखा कि एक मनुष्य अपने खेत में बैठकर विलाप कर रहा था कि वह मनुष्य बहुत जोर-जोर से रो रहा था उसका ऐसा रोना मुझे देखा नहीं गया मैं उसके पास जाकर प्रकट हुआ और उससे पूछा कि है पुत्र तुम क्यों रो रहे हो तब उसने मुझे बताया कि हे प्रभु पिछले ही महीने मेरी पत्नी का निधन हो गया है

और मेरी एक पुत्री है वही मुझे खाना बना कर खिलाती है लेकिन मेरी पत्नी के मरने के बाद मैं दिन-ब-दिन गरीब होता जा रहा हूं पता नहीं क्यों मेरी पत्नी के मरने के बाद माता लक्ष्मी मेरे घर को छोड़कर चली गई है देखो आज मेरे खेत को कई सारे जंगली जानवर चर कर गए हैं मेरा अब कोई सहारा नहीं बचा है
देवर्षि नारद जी आगे कहते हैं है माते जब उस मनुष्य ने मुझे ऐसे करूणा शब्द कहे तब मुझे रहा नहीं गया और मैं इसी प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आपके पास आया हूं कि आपने उस मनुष्य का घर क्यों छोड़ा दिया है ऐसा कौन सा पाप हो गया था उस मनुष्य से जिसकी वजह से आपने उसके घर को ही त्याग दिया देवर्षि नारद जी की बात सुनने के बाद अब माता लक्ष्मी आगे कहती हैं
यह कलयुग की समस्त स्त्रियों के लिए बहुत ही लाभप्रद है मैं तुम्हें आज एक कहानी के माध्यम से वह युक्ति बताने वाली हूं जिसकी वजह से मैं मनुष्य के घर पर ठहरती हूं और अगर मनुष्य इस काम के विपरीत कार्य करता है तो मैं उसके घर को त्याग देती हूं अंत मैं तुम्हें उस मनुष्य के बारे में भी बताऊंगा जिस वजह से वह गरीब होता चला जा रहा है

मैं तुम्हें जो कहानी सुनाने जा रही हूं वह कहानी बहुत ही धार्मिक है और ज्ञान से भरी हुई है इस कहानी को पूरा देखने वाले मनुष्य के घर में मेरा वास होता है और इस कहानी में बताए गए नियमों को अगर कोई भी स्त्री परिणाम स्वरुप करती है तो मैं उसके घर से वापस चली जाती हूं
माता लक्ष्मी जी कहती हैं – रोज सुबह खाना बनाने वाली औरतें ये आर्टिकल जरूर पढ़ें नहीं तो आएगी भयंकर गरीबी.देवर्षि नारद जीअब देवर्षि नारद जी कहते हैं हे माते कृपया आप मुझे इस कहानी का अनुसरण करिए क्योंकि मैंने उस मनुष्य को वचन दिया है कि मैं तुम्हारी समस्याओं का समाधान लेकर तुम्हें बताने के लिए अवश्य आऊंगा इसीलिए है माते मैंने मेरे वचन को झूठा मत होने देना है
देवर्षि नारद जी मैं आपके वचन को झूठा नहीं होने दूंगी और उस मनुष्य के विषय में मैं आपको अंत में बताऊंगी और कहानी का आरंभ करती हुई माता लक्ष्मी जी कहती हैं एक समय की बात है किसी नगर में एक रमाशंकर नाम का आलसी इंसान रहता था वह इतना आलसी था की खटिया पर जिस तरफ करवट लेता था

उसी करवट लेता रह जाता था करवट बदलने में भी उसे परेशानी नजर आती थी उसकी पत्नी बेचारी जब किसी काम के लिए उससे कहती थी तभी वह करवट बदलता था और पत्नी की तरफ पीठ फेर कर पड़ा रहता था उनकि इन आदतों को देखते हुए पत्नी को विश्वास हो गया था कि वह कभी कुछ नहीं कर पाएगा एक दिन पत्नी ने बड़े ही प्रेम से उसे समझाया और बोली मैं जानती हूं कि तुम्हें खटिया से उठने में कष्ट होता है किंतु इस तरह एक ही करवट लेते रहने से भीआदमी नाकारा हो जाता है
और आप बाहर नही जाना चाहते हैं तो खटिया पर बैठे-बैठे ही कुछ करते रहो तब वह रमाशंकर ने सोचने लगा ऐसी कौन सा काम है जिसे खटिया पर बैठे-बैठे ही किया जा सकता है दोस्तों कुछ देर बाद उसके समझ में बात आई वह खुश होकर अपनी पत्नी से बोला अरे सुनती हो मैं बैठे बिठाए काम ढूंढ लिया है अब चिंता करने की जरूरत नहीं है
तब उसकी पत्नी प्रसन्न हुई कि आब कुछ तो घर का काम होगा उसने सब्जी की टोकरी में चाकू रखा और उसके आगे रखती हुई बोली अब बैठे-बैठे सब्जी काट डालो अब सब्जी और चाकू देकर वह वहां से चली गई किंतु आलसी ने तो उस और ध्यान ही नहीं दिया थोड़ी देर बाद पत्नी जब सब्जी लेने पहुंची तो पाया कि पतिदेव खटिया पर बैठे हुए मच्छर गिन रहे हैं

एक दो तीन और चार पांच पत्नी ने देखा कि उनके बिस्तर पर मच्छर मरा पड़ी है पत्नी को देखते ही अब रमाशंकर उछाल कर बोला देखा मेरा कमाल मैं कितनी फुर्ती से साथ मच्छरों को मौत के घाट उतार दिया है अब देखना तुम मैं पूरे दिन में कितनी मच्छरों को मार सकता हूं अब उस आलसी आदमी को तो अब वही धुन सवार हो गई और उसे जहां मच्छर दिखता वह वही फट से हाथ मार देता कई बार तो अपनी हीगर्दन पर इतनी जोर से हाथ जमाया की उसकी गर्दन टेढ़ी हो गई
कई बार पत्नी की नाक तोड़ दी मच्छर मारने के चक्कर में उसने घर के बर्तन तोड़ डालें क्योंकि रमाशंकर ने प्रतिज्ञा कर ली थी कि कम से कम वह हजार मच्छर मार कर ही दम लगा जल्दी ही वह दिन भी आ गया जब उसकी प्रतिज्ञा पूरी हो गई अब उस दिन आलसी ने सारे शहर का चक्कर लगाया कंधे पर बास का एक मजबूत डंडा रखा और खुशी से उछलता कूदता अपनी बहादुरी का बखान करता जा रहा था
और चिल्लाता जा रहा था कि आज हजारों को मौत के घाट उतार आया हूं यह सुनकर लोग भयभीत हो गए उन सभी को लगा कि उसने हजारों शैतानों को मौत के घाट उतार दिया है जो पास के जंगल में रहते थे अब यह बात सारे शहर में हवा की तरफ फैल गई कि उसने हजारों को मौत के घाट उतार दिया है लोगों ने उसका नाम हजारमारी रख दिया और आलसी महोदय जी सड़क या गली से गुजरते थे

वहीं लोगों की भीड़ उमर पड़ती थी सभी उस बहादुर को देखना चाहते थे जिसने हजारों शैतानों को मौत के घाट उतारा है और वह धीरे-धीरे हजारमारी सारे राज्य में प्रसिद्ध हो गया कुछ दिनों बाद उस राज्य पर एक दूसरे राजा ने अचानक हमला बोल दिया राजा के पास उस समय कोई अच्छा सेनापति नहीं था
उसने दुतौं को आदेश दिया कि वे तुरंत सारे राज्य में घूम कर देखें और जहां भी उन्हें सेनापति के योग्य कोई व्यक्ति दिखाई दे उसे फौरन हमारे दरबार में हाजिर करें आदेश पाते ही दूर जहां तहां शहरों में उसके सैनिक घूमने लगे और उन्हीं दिनों में हजारमारी का नाम सर्वत्र गूंज रहा था
दुतौं ने जब हजारमारी का नाम सुना तो वह उसके घर जा पहुंचे और राजा के दुतौं को अपने घर पर आया हुआ देखकर हजारमारी भय से कांपने लगा वह घर के अंदर एक अंधेरे कमरे में छुपकर बैठ गया उन सभी सैनिकों ने पत्नी से बातचीत होने पर मालूम हुआ कि राजा ऐसे बहादुर को अपना सेनापति बनाना चाहते हैं
जिसने हजारों दैत्यों को मारा हो इसलिए तुम उसे जल्दी हमारे साथ भेज दो पत्नी को लगा जैसे वह कोई सपना देख रही है अपने पति की असलियत को वह जानती ही थी अब वह सोचने लगी काश ऐसा हो सकता किसी तरह राजा के दूत हजारमारी को अपने साथ लेकर राजा के दरबार में पहुंचे उस लंबे तगड़े नौजवान को जब राजा ने अपने सामने खड़ा पाया तो वह मन ही मन बहुत प्रसन्न हुआ और पूछा तुम्हारा ही नाम हजारमारी है

माता लक्ष्मी जी कहती हैं – रोज सुबह खाना बनाने वाली औरतें ये आर्टिकल जरूर पढ़ें नहीं तो आएगी भयंकर गरीबी.देवर्षि नारद जीअलसी बोला जी हुजूर मुझे ही हजारमारी कहते हैं राजा बोला तुम्हारी बहादुरी के चर्चे हमने सुना हैं हम चाहते हैं कि शत्रु के साथ हो रहे इस युद्ध में तुम हमारी सेना का संचालन करो और कांपते हुए हजारमारी ने राजा की आज्ञा को स्वीकार कर लिया और इस बात की सूचना अपनी पत्नी को देने के लिए घोड़े पर सवार होकर पत्नी के पास जा पहुंचा और अपनी पत्नी से राजा के द्वारा कहे गए सभी शब्दों को कह दिया और वह सुनकर उनकी पत्नी का खुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने सोचा हजारमारी सेनापति तो बन गया है
परंतु वह शत्रु की सेना का मुकाबला कैसे करेगा कहीं यह डरपोक आदमी युद्ध के मैदान में घोड़े से उतरकर भाग आया तो राजा इसे जीवित नहीं छोड़ेगे और उसने एक मजबूत रस्सी से हजारमारी को घोड़े से बांधना शुरू कर दिया और हजारमारी ने पूछा यह क्या कर रही हो हजार मारी की पत्नी ने जवाब दिया कि मैं आपको घोड़े के साथ बांध रही हुं
तब हजार मारी ने पूछा कि ऐसा किस लिये कर रही हो तब पत्नी ने जबाब दिया कि मैं आपको घोड़े से इसलिए बाध रही हूं कि कहीं आप लड़ाई के लिए उतावले होकर घोड़े से कूद ना पड़े और आप पैदल ही ना लड़ने लगे अब पत्नी के इतना कहने के बाद हजारमारी फिर से राजा के महल में चला गया

और वापस लौटने पर भरे दरबार में जब लोगों ने हजारमारी को घोड़े से बंधा हुआ पाया तो उनका उत्साह और भी बढ़ गया उन्होंने सोचा ऐसा वीर सेनापति दूसरा और कौन हो सकता है तब सेना युद्ध के लिए तैयार थी राजा की आज्ञा पाते ही हजार मारी के नेतृत्व में वे युद्ध भूमि कि ओर चल पड़े शत्रु की सेना को जब मालूम हुआ कि एक बड़ी फौज के साथ हजारमारी मुकाबला करने चल पड़े हैं
तो उनके योद्धाओं को मनोबल टूट गया क्योंकि उन्होंने सुन रखा था कि हजारमारी अकेला ही हजारों को मार गिराता है यह नाम सुनते ही बड़े-बड़े योद्धाओं के होश उड़ गए उन्हें साक्षात अपनी मृत्यु नजर आने लगी उधर हजारमारी की सेना का उत्साह आसमान को छू रहा था
मैदान में पहुंचते ही शत्रु की सेना पर टूट पड़े दोनों सेनाओं के बीच घमासान युद्ध होते देख हजार मारी अपने घोड़े के साथ एक घने जंगल में जाकर छिप गया किंतु उसकी सेना ने शत्रुओं को दम न लेने दिया वह शत्रु का मुकाबला करती हुई उसे छदेर ले गई और अपने राज्य से निकल बाहर कर दिया शत्रु पर विजय पाने के बाद अपने सेनापति की जय जय करते हुए जब सैनिक वापस लौटने लगे तो हजारमारी भी
जंगल से बाहर निकालकर उनके बीच में शामिल हो गया वापस लौटने के बाद नगर में धूमधाम से विजय उत्सव मनाया गया हजारमारी की वीरता पर राजा प्रसन्न हो उठे उन्होंने हजार मारी के पास जाकर कहा कि मेरे बहादुर सेनापति हमें तुम पर गर्व है तुम्हारी अव्दितीय वीरता के कारण हमें विजय प्राप हुईं हैं इसके लिए पुरस्कार स्वरूप में हम तुम्हें दो हजार स्वर्ण मुद्राएं देते हैं
साथ ही हमेशा के लिए तुमको हम अपनी सेना का प्रधान सेनापति नियुक्त करते हैं यह घोषणा सुनकर हजार मारी बहुत प्रसन्न हुआ और मन में ही मन अपने भाग्य को सराह लगा इसके बाद राजा ने पूछा कि बहादुर सेनापति हजार मारी जो आप हमें यह बताइए की आप इतना बहादुरी भरा काम इतनी आसानी से कैसे कर लिए तब हजार मारी ने बड़े ही गर्व के साथ जवाब देते हुए कहा कि है
राजन यह जो सब कुछ भी हुआ है यह सब मेरी समझदार पत्नी की वजह से हुआ है इसमें एक बहुत ही गुप्त राज्य छिपा हुआ है जिसे मैं आपको अकेले में राजमहल से बाहर अपने घर पर ही बताना उचित समझाऊंगा राजा ने पूछा कि सेनापति हजार मारी यह बताओ कि तुम यहां वह गुप्त बात क्यों नहीं बता सकते हो तो उसने कहा यही तो मेरी सफलता का राज्य है
जिसे मैं सबके सामने नहीं बता सकता हूं आपको मेरे साथ बाहर मेरे घर चलना पड़ेगा राजा ने कहा ठीक है मैं तुम्हारे साथ राजमहल से बाहर तुम्हारे घर जाने के लिए तैयार हूं तब राजा और सेनापति दोनों एक साथ राज महल से सेनापति हजार मारी जिसका नाम कभी रमाशंकर था उसके घर गए जब वह घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सेनापति हजारमारी की पत्नी अपने घर में बैठी बड़ी बेसब्री से अपने पति का इंतजार कर रही थी
जैसे ही हजार मारी की पत्नी ने सुबह-सुबह अपने पति और राजा साहब को अपने घर पर आया हुआ देखा वह तुरंत उठी और राजा साहब के सम्मान के लिए उपयुक्त व्यवस्था करने में जुट गई फिर राजा का बड़े ही सम्मान के साथ स्वागत सत्कार किया और वह खाना तो बना ही चुकी थी तभी उसने राजा साहब को खाने के लिए भी चौकी सजा दी और राजा साहब को सुबह-सुबह ही अच्छा-अच्छा खाना खिला दिया अब हजार मारी बोला है

माता लक्ष्मी जी कहती हैं – रोज सुबह खाना बनाने वाली औरतें ये आर्टिकल जरूर पढ़ें नहीं तो आएगी भयंकर गरीबी.देवर्षि नारद जीमहाराज अब तो आपने देखा ही लिया होगा और समझ भी गए होंगे कि मेरी जीत का असली राज्य क्या है तब महाराज ने कहा सेनापति जी आप कहना क्या चाहते हैं तब हजार मारी ने कहा महाराज जैसा कि हम सभी को पता है कि जिस घर की महिला सुबह प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाती है उसके घर में कभी भी माता लक्ष्मी की कमी नहीं होती है
और उसके यहां मां लक्ष्मी का वास होता है और वही जिस घर की महिलाएं सुबह जल्दी खाना नहीं बनती है उसके घर की कभी तरक्की नहीं होती है अब हजार मारी आगे कहता है राजा साहब हम सभी लोग यह जानते हैं कि जिस घर में सुबह जल्दी खाना बन जाएगा तो उस घर की तरक्की कुछ ऐसी होती है सुबह जल्दी खाना बनेगा तो घर के बच्चे जल्दी स्कूल के लिए भी चले जाएंगे और यदि कोई व्यक्ति कहीं काम करता है या फिर किसी को कोई जरूरी काम है
तो वह घर से कभी भी खाली पेट नहीं जाएगा वह कभी भी खाना खाने के बाद ही जा सकता है और अपना पूरा काम पूरी लगन और मन के साथ करेंगे और तो सुबह-सुबह जो भी स्त्री जल्दी खाना बना लेती है उसके घर में तरक्की होना बिल्कुल तय है हजार मारी ने फिर राजा साहब से जो भी उसके जीवन में अपनी पत्नी के प्रति सहायता की बातें जितनी भी थी
और वह युद्ध में किस प्रकार से जीता था यह सब राजा साहब को बता देता है तब राजा साहब यह सब जानने के बाद कहते हैं आपने बिल्कुल सही कहा सेनापति जी जिस घर की महिला सुबह जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सारे घर के कार्य कर लेती है और सुबह जल्दी खाना बना लेती उस घर की तरक्की तो बिल्कुल तय है
उसके बाद राजा साहब ने हजार मारी की पत्नी को ढेर सारी अशरफिया और जवाहर रात से सम्मानित किया अब माता लक्ष्मी जी कहती हैं हे देवर्षि नारद जी अब तो आपको अच्छी तरह से समझ में आ गया होगा कि किसी भी घर की तरक्की के लिए महिला का योगदान सर्वोपरि होता है और कहते हैं ना कि किसी भी कामयाब व्यक्ति के पीछे किसी महिला का हाथ जरूर होता है और घर की महिला यदि चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है और चाहे तो नर्क बना सकति हैं हे देवर्षि नारद जी अब मैं तुम्हें बताती हूं कि

उस मनुष्य के घर पर गरीबी क्यों आईं हुई थी और मैंने उसके घर से अप्रस्थान क्यों किया है क्योंकि उस मनुष्य की पत्नी के मरने के बाद उसकी पुत्री समय पर कोई कार्य नहीं करती है वह सुबह आठ बजे उठती है और दस बजे तक खाना बनाया करती थी और ना कोई पूजा पाठ करती है और ना ही धर्म से चलती थी वह अपने मासिक धर्म के दौरान भी खाना बनाती थी
इसलिए ही मैंने उस मनुष्य के घर को छोड़ दिया था इस वजह से ही वह मनुष्य अब गरीब है अब देवर्षि नारद जी माता लक्ष्मी की इतनी बात सुनने के बाद कहते हैं है माते आपका मुझे इस कथा के माध्यम से और उस मनुष्य के जीवन के बारे में निष्कर्ष प्रदान करने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद अब मैं उस मनुष्य की समस्या का समाधान कर पाऊंगा अब माता लक्ष्मी जी कहती हैं
हे देवर्षि नारद जी मैं आपको पांच बातें बताती हूं जिस वजह से मैं मनुष्य के घर में वास करती हूं पहले स्वच्छता जिस घर में स्वच्छता और साफ सफाई का ध्यान रखा जाता है वहां मेरा वास होता है गंदगी और अव्यवस्था मुझको अप्रिय लगती है इसलिए घर का हर कोना स्वच्छ और सुसज्जित रखना चाहिए
दोस्तों दूसरा सत्कार और सम्मान जिस घर के सदस्यों और अतिथियों का आदर सत्कार होता है वहां मैं प्रसन्न रहती हूं अतिथियों के स्वागत और सेवा में तत्पर रहने वाले हमेशा ही मेराआशीर्वाद पाते हैं मित्रों तीसरा धार्मिकता और पूजा जिस घर में नियमित रूप से पूजा पाठ होता है वहां में विशेष रूप से वास करती हु और जैसे की लक्ष्मी पूजा दीपावली और शुक्रवार के दिन मेरी पूजा करना अत्यंत आवश्यक है
मैं इस दिन प्रसन्न होती हूं दोस्तों चौथा जहां परिश्रम ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रवृत्ति होती है वहां पर मैं निवास करती हूं अलस्यसी और अनैतिकता से मैं दूर चली जाती हूं मित्रों पांचवा धन और दान को सही दिशा जहां लोग धन का सदुपयोग करते हैं जरूरतमंदों की सहायता करते हैं और धार्मिक कार्यों में दान करते हैं वहां मेरी कृपा बनी रहती है
और माता लक्ष्मी की इतनी बात सुनकर देवर्षि नारद जी माता लक्ष्मी को प्रणाम करते हैं और वहां से अंतर्ध्यान हो जाते हैं दोस्तो उस मनुष्य को सारी बातें जाकर बताते हैं वह मनुष्य अब देवर्षि नारद जी के बताए हुए रास्ते पर चलता है इस वजह से वह धीरे-धीरे उसके घर में भी माता लक्ष्मी का प्रवेश होने लगता है

वह भी अब एक खुशी जीवन जीने लगता है दोस्तों अगर हमारी कहानी समझ में आ गई हो तोआर्टिकल को लाइक करके कमेंट में जय मां लक्ष्मी अवश्य की टाइम देने के लिए धन्यवाद और हमारा टेलीग्राम चैनल अवश्य ज्वॉइन करें














