फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादःनवाब अब्दुल समद का मकबरा यह ऐतिहासिक शिव मंदिर। फतेहपुर में इसे लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को भी संभालना मुश्किल पड़ गया।
विवाद के एक दिन पहले हिंदू संगठनों ने डीएम से इस मकबरे में पूजा पाठ की इजाजत मांगी थी। हालांकि इजाजत तो नहीं मिली मगर मकबरे के आसपास बैरिकेडिंग करते हुए भारी फोर्स जरूर तैनात कर दी गई। फिलहाल 11 अगस्त सोमवार के दिन बड़ी संख्या में हिंदूवादी संगठन मौके पर जमा हुए।
फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादःज्यादातर लोगों के हाथों में भगवा झंडा था।

मौके पर पुलिस भी बड़ी संख्या में तैनात थी।फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादः उधर मुस्लिम समुदाय के लोग भी मकबरे की ओर बढ़ने लगे। जिससे माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
हिंदू संगठनों और बीजेपी जिला अध्यक्ष के आवाहन पर सोमवार को सैकड़ों की भीड़ नारेबाजी करते हुए बैरिकेडिंग तोड़कर आबू नगर रडैया स्थित कथित अब्दुल समद के मकबरे में घुस गई। तोड़फोड़ की और ऊपर चढ़कर भगवा ध्वज फहराया। हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।
मुस्लिम समुदाय की भीड़ भी जुटी और विरोध किया।
इस मामले में पुलिस ने 10 लोगों को नामजद करते हुए 150 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादःफतेहपुर के सदर तहसील स्थित नवाब अब्दुल समद मकबरे को बीजेपी जिला अध्यक्ष ने मंदिर होने का दावा भी किया है। और उन्होंने इसे लगभग 1000 वर्ष पुराना मंदिर भी बताया है। इस मकबरे में ठाकुर जी और भगवान शिव कि मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति और बीजेपी समेत कई हिंदू संगठनों ने 11 अगस्त को पूजा पाठ करने का ऐलान किया था।
मंदिर के स्वरूप को बदलकर इसे मकबरा बनाने का आरोप भी लगाया।

हिंदू संगठनों का कहना है कि मकबरे में कमल के फूल और त्रिशूल जैसे चिन्ह हैं। जिससे पुष्टि होता है कि यह प्राचीन मंदिर था। और बाद में मकबरे में तब्दील कर दिया गया।
हिंदू धर्म में पैदा हुए हैं। और पूजा करने का अधिकार लेकर पैदा हुए हैं। हमारे अधिकार से कोई हमको वंचित नहीं कर सकता है। और वो हमारा मंदिर है। उस मंदिर का जो नमूने मकबरा बता रहे हैं उन नमूनों का इलाज करने के लिए हम लोग भीड़ एकत्रित हुए हैं। उनको समझाने के लिए एकत्रित हुए हैं। और हमारे मंदिर को छोड़ दो और हमें रास्ता दो। यदि रास्ता नहीं मिलेगा तो हम ऐसे तूफान है कि रास्ता खुद बनाते हैं ।
वर्तमान में मकबरे के मुतव्ली होने का दावा करने वाले शख्स का कहना है
मकबरा मुगल कालीन शासक अकबर के पौत्र ने करीब 500 साल पहले बनवाया था। यह 10 साल में बनकर तैयार हुआ। यहां पर अबू मोहम्मद और अबू समद की मजारें हैं। यह मकबरा करीब 12:30 बीघे में बना हुआ है और पूरा विवाद जमीन को लेकर है।
भूमाफियाओं की नजरें मकबरे की जमीन पर हैं।
दूसरे पक्ष का दावा है कि मकबरे के भीतर शिवलिंग मौजूद है। मकबरे के बरामदे में मजार के पास नंदी जी विराजमान रहा करते थे। हिंदू संगठनों का दावा है कि मकबरे की दीवारों और गुंबद में फूल त्रिशूल जैसी आकृतियां उकेरी गई हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि 2007 की दिवाली तक विवादित स्थल के अंदर जाकर पूजा होती थी।हिंदू धर्म के प्रतीक चिन्ह मौजूद थे।
फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादःशिवलिंग और नंदी भी विराजमान थे। फिर साल 2011 के आसपास मंदिर का स्वरूप बदला। वहां की दीवारों पर उर्दू अरबी में कलमा लिखा गया। मकबरे का मनगढ़न ढंग से इतिहास बता दिया गया और मंदिर के स्वरूप को मकबरे में तब्दील कर दिया गया है।
दावा किया जा रहा है

रेडैया स्थित मकबरा वास्तव में ठाकुर जी का विराजमान मंदिर हैफतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादः जहां पर शिवलिंग भी मौजूद था। वहां घंटे नहीं लगे लेकिन आज के वक्त में जंजीरें हैं और सीढ़ियां भी बनी हुई हैं। कई अवशेष बताते हैं कि यह हिंदू देवी देवताओं का मंदिर है। आपको यहां यह भी बताते चले कि विवादित स्थल को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। एक पक्ष इसे मकबरा और दूसरा ठाकुर जी का मंदिर बताता है।फतेहपुर मकबरा-मंदिर विवादः लेकिन यह पूरा मामला पहले से ही सिविल कोर्ट फतेहपुर में विचाराधीन भी है। आगे की जानकारी हम अवश्य बताएंगे धन्यवाद














