डॉनल्ड ट्रम्प अपनी आदत से बाज नहीं आते। ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से टेरिफ पर झटका लगने के बावजूद ट्रंप सुधरे नहीं हैं।डॉनल्ड ट्रम्प,ने कहा कि अब सभी देशों पर वह पहले से टेरिफ लगा चुके हैं उन पर 10% एक्स्ट्रा टेरिफ लगाएंगे। लेकिन सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टेरिफ को रद्द क्यों किया?
ट्रंप टैरिफ उसके पीछे का कारण क्या है?

दरअसल शुक्रवार को दिए गए 63 के फैसले में यूएस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प, ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर कदम उठाया है। इस टिप्पणी का मतलब यह है कि जो उनके अधिकार में नहीं है उससे ज्यादा चलने की वह कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने 1977 के आपातकालीन आर्थिक कानून यानी आईईपीए का इस्तेमाल कर लगभग सभी व्यापारिक भागीदार देशों से आयात पर भारी शुल्क लगा दिया था।
इसमें सहयोगी देश कनाडा से लेकर भारत तक शामिल थे।gsp भारत मैं हालही में 50% टेरिफ लागू था। जिसे छोड़े व्यापार समझौते के बाद निर्देशों में 25% किया गया और आगे 18% करने की योजना थी।
कोर्ट ने कहा यह कानून मूल रूप से दुश्मन देशों पर प्रतिबंध या संपत्ति फ्रीज करने के लिए बनाया गया था ना कि इसके अपने इस्तेमाल के लिए यानी ना कि व्यापार व्यापक कर लगाने के लिए।
इस फैसले को 12 अमेरिकी राज्यों और कई कंपनियों ने चुनौती दी थी। जिन्होंने इसे सत्ता का अप्रत्याशित दुरुपयोग कहा।अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सरकार को आईईईपीए आधारित टेरिफ से वसूले गए लगभग 175 अरब डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं।
कोर्ट ने यह साफ नहीं किया कि कंपनियों को रिफंड मिलेगा या नहीं। वेयर हाउस रिटेल चेन कॉस्ट को सहित कई कंपनियां पहले ही कोर्ट में धन वापसी की मांग कर चुकी हैं।
डॉनल्ड ट्रम्प,प्रशासन अब अपनी व्यापार नीति जारी रखने के लिए नए कानूनी रास्ते तलाश रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा या अनुचित व्यापार के खिलाफ कारवाई से जुड़े कानून। लेकिन टेरिफ के मुताबिक इन कानूनों में आईईईपीए जैसे व्यापक और तत्काल कार्रवाई की शक्ति नहीं है।
- सवाल उठता है कि क्या टेरिफ से जुटाए गए पैसे अब देशों को वापस करने होंगे?
- कोर्ट के आदेश से ट्रंप के सभी टेरिफ खत्म नहीं हुए हैं।
- स्टील और एलुमिनियम पर लगाए गए टेरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प,ने अप्रैल 2025 में नेशनल सिक्योरिटी का हवाला देते हुए दुनिया के कई देशों से आने वाले सामान पर भारीभरकम टेरिफ लगा दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को फटकारते हुए
कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है।
डॉनल्ड ट्रम्प,ने दो तरीके का टेरिफ लगाया।

- पहला रेसिप्रोकल टेरिफ इसमें चीन पर 34%और बाकी दुनिया के लिए 10% बेसलाइन टेरिफ तय किया था। कोर्ट के फैसले के बाद यह टेरिफ अमान्य हो गए हैं।
- दूसरा 25% टेरिफ ट्रंप ने कनाडा, चीन और मेक्सिको से आने वाले कुछ सामानों पर 25% टेरिफ लगाया था।
- भारत दूसरी कैटेगरी में शामिल था।
- डॉनल्ड ट्रम्प,ने भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने की शर्त रखी थी। भारत के इंकार करने पर टेरिफ को 50% किया
- गया। बाद में यूएस इंडिया डील के बाद इसे घटा दिया गया।
हाल ही में यूएस के साथ हुए ट्रेड डील के बाद ट्रंप ने भारत पर लगे टेरिफ को घटाकर 18% कर दिया।
कोर्ट के फैसले ने 25% टेरिफ को भी निरस्त कर दिया है/
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प,के खिलाफ अमेरिका के कई छोटे कारोबारी और 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था। यह राज्य थे एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिक, डिलावेयर, इलनोय, मेन, मेनसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वमा। तो क्या अब बाकी देशों को रिफंड मिलेगा?
कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ नहीं
- सरकार को कंपनियों को वसूला गया पैसा लौटाना पड़ेगा या नहीं।
- ट्रंप ने इसके पहले कहा था कि अगर वह सुप्रीम कोर्ट में केस हार गए तो कई देशों के साथ हुए व्यापार समझौतों को रद्द करना पड़ जाएगा। साथ में रिफंड भी होगा। कई देशों की कंपनियों ने रकम के रिफंड के लिए क्लेम भी प्रोसेस किया है।













